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2G घोटाला: इन मामलों में भी फेल हुई है CBI, ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लगा चुकी है फटकार

CBI को कभी सुप्रीम कोर्ट ने ''पिंजड़े में बंद तोता'' कहा था और यह एजेंसी कोर्ट में ऐसे तमाम केसों में नाकाम रही है।

2G घोटाला: इन मामलों में भी फेल हुई है CBI, ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लगा चुकी है फटकार

CBI कई हाई प्रोफाइल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों के न्यायिक इम्तिहान में उसी प्रकार नहीं टिक पाई जिस तरह 2G स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में वह नाकाम हुई।

CBI को कभी सुप्रीम कोर्ट ने 'पिंजड़े में बंद तोता' कहा था और यह एजेंसी कोर्ट में ऐसे तमाम केसों में नाकाम रही है। इससे इसके द्वारा की गई जांच पर सवाल उठे हैं।

2G स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित भ्रष्टाचार के मामलों से लेकर आरुषि मर्डर केस जैसे सनसनीखेज आपराधिक मामलों में CBI की जांच को न सिर्फ ट्रायल कोर्ट में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा बल्कि उच्च न्यायपालिका और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में भी एजेंसी को फटकार पड़ी।

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2G मामले में एक को भी नहीं दिला पाई सजा

2G स्पेक्ट्रम के जिन मामलों ने मनमोहन सिंह की अगुआई वाली UPA-2 सरकार को हिला दिया था, उनमें CBI ने 4 अलग-अलग मामलों में लाखों पेज में चार्जशीट दाखिल की लेकिन एक भी आरोपी को सजा नहीं दिला पाई।

स्पेशल 2G कोर्ट में चले एयरसेल-मैक्सिस डील और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन के 2 दो मामलों में आरोपी बरी हो चुके थे, तो मुख्य मामले जिसमें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और दूसरे आरोपी थे, में भी सभी आरोपी गुरुवार को बरी हो गए।

2G जुड़े सभी मामलों की सुनवाई करने वाले स्पेशल CBI जज ओ. पी. सैनी ने एस्सार ग्रुप और लूप टेलिकॉम के प्रमोटर्स को भी बरी किया।

आरुषि-हेमराज मामले में भी हुई तीखी आलोचना

बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में भी CBI को इस साल अक्टूबर में इलाहाबाद हाई कोर्ट में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा और कोर्ट ने CBI की दलील को 'असंभव कल्पना' और 'साफ-साफ बेतुका' बताया था।

हाई कोर्ट ने आरुषि के माता-पिता राजेश और नूपुर तलवार को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में बुरी तरह नाकाम रहा कि तलवार दंपति ने सबूतों को नष्ट किया। तलवार दंपती को गाजियाबाद की अदालत ने 2013 में दोषी ठहराया था और उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

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बोफोर्स केस में भी नहीं ठहर पाई

राजनीतिक रूप से संवेदनशील बोफोर्स केस में भी CBI की जांच न्यायिक इम्तिहान में नहीं ठहर पाई और दिल्ली हाई कोर्ट ने 31 मई 2015 को हिंदुजा बंधुओं-श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाशचंद के साथ-साथ बोफोर्स कंपनी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

जिस तरह से CBI ने बोफोर्स केस को हैंडल किया था उसके लिए उसे हाई कोर्ट से फटकार भी लगी थी। CBI ने कहा था कि बोफोर्स सौदे में दलाली से सरकारी खजाने को 250 करोड़ रुपये का चूना लगा था।

राजीव गांधी हत्याकांड में भी सुप्रीम कोर्ट के रडार पर

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में CBI जांच हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के रडार पर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच में अभी तक कुछ खास प्रगति नहीं हुई है और यह 'अंतहीन' हो सकती है।

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कोल स्कैम में भी उठे सवाल

कोल स्कैम में भी CBI की जांच पर सुप्रीम कोर्ट और स्पेशल ट्रायल कोर्ट में सवाल उठे। इस साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव से जुड़े चारा घोटाला मामले में 'एजेंसी की जांच उसकी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं' है।

कोर्ट ने कहा कि अपील फाइल करने में 'असहनीय शिथिलता' बरती गई। कर्नाटक के बेल्लारी में कथित अवैध खनन के मामले में भी CBI को कोर्ट से झटका लगा।

CBI ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा और दूसरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी लेकिन ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

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