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नॉर्थ कोरिया के सनकी तानाशाह ने 2 और अधिकारियों की ली जान, जानिए पांच साल में कितनों को उतारा मौत के घाट

उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग-उन की परमाणु और मिसाइल परीक्षण की सनक लगातार बढ़ रही है।

नॉर्थ कोरिया के सनकी तानाशाह ने 2 और अधिकारियों की ली जान, जानिए पांच साल में कितनों को उतारा मौत के घाट
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उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग-उन की परमाणु और मिसाइल परीक्षण की सनक लगातार बढ़ रही है। किम को देरी तक कतई बर्दाश्त नहीं है, इसलिए हाल ही में मिसाइल परीक्षण में देर होने पर तानाशाह ने अपने 2 शीर्ष अधिकारियों को मरवा दिया।

इन दोनों में से एक अधिकारी ने न्यूक्लियर बेस पर हुए हादसे की जिम्मेदारी ली थी। जिसके बाद मिसाइल परीक्षण कुछ दिन के लिए टाल दिया गया था और इसी वजह से किम जोंग गुस्से में था। देरी होने के बाद ये मिसाइल परीक्षण 3 सितंबर को हुआ था।

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किम के गुस्से का शिकार हुए अधिकारी पर्क इन-यंग पर ही न्‍यूक्लियर बेस को चलाने और इमारत की देखरेख करने की जिम्मेदारी थी। अधिकारी पर्क इन उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ पार्टी की सेंट्रल कमेटी के डिविजन यानी ब्यूरो 131 के मुख्य थे।

ऐसा है सनकी तानाशाह किम जोंग-उन

बता दें कि इस कमेटी पर उत्तर कोरिया के सैन्य संस्थानों, सैटेलाइट लांचिंग स्टेशन और न्यूक्लियर साइट की निगरानी करने की जिम्मेदारी रहती है।

तानाशाह ने इससे 5 दिन पहले जनरल ह्वांग प्योंग-सो को मरवा दिया था। वो उत्तर कोरिया के सेना के वाइस मार्शल थे और कुछ दिनों पहले अचानक से गायब हो गए थे। जिसके बाद ये माना जा रहा था कि सनकी तानाशाह ने उनकी हत्या करवा दी।

मिसाइल परीक्षण में देरी से था नाराज

जापानी अखबार असाही शिम्बुन के अनुसार, अधिकारी पर्क इन-यंग न्‍यूक्लियर बेस का संचालन देख रहे थे और मिसाइल परीक्षण में देरी और न्यूक्लियर बेस की सुरंग की मरम्मत समय से नहीं होने से तानाशाह इनसे नाराज था।

मिसाइल परीक्षण से पहले 3 सितंबर को हाइड्रोजन बम के परीक्षण के बाद न्यूक्लियर बेस की सुरंग ढह गई थी, जिसके चलते कम से कम 200 काम करने वाले लोगों की मौत हो गई थी।

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5 साल में 340 लोगों को उतारा मौत के घाट

सुरंग की मरम्मत न हो पाने से मिसाइल परीक्षण में देरी हुई और इसके परिणाम स्वरुप तानाशाह ने इन दोनों अधिकारियों को सजा-ए-मौत दे दी।

जानकारी के मुताबिक, ऐसा बताया जा रहा है कि तानाशाह किम जोंग-उन पिछले 5 साल में सत्ता के लिए 340 लोगों को मौत के घाट उतार चुका है, जिसमें ज्यादातर सीनियर अधिकारी हैं।

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