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तिरुपति मंदिर को गैर-हिंदुओं से तौबा, माथे पर खास टीका लगाना अनिवार्य

1989 से 2007 तक जो भी व्यक्ति हिंदू धर्म को खुलकर स्वीकार करता था उन व्यक्तियों की भर्ती गैर-शिक्षण श्रेणी में की जा सकती थी।

तिरुपति मंदिर को गैर-हिंदुओं से तौबा, माथे पर खास टीका लगाना अनिवार्य

तिरुमाला तिरुपति देवस्थाम ने अपने 44 गैर हिंदू कर्मचारियों के लिए एक अजीब कारण के लिए नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही इन कर्मचारियों के लिए 'थिरू-नामम' अनिवार्य करने का आदेश दिया गया है।

टीटीडी ने कर्मचारियों से पहले भी इस बारे में सफाई पेश करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि टीटीडी बोर्ड दुनिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर का प्रबंधन करता है, उसने 'थिरू-नामम' अनिवार्य करने का आदेश दिया है।
आइए जानते हैं कि 'थिरू नामम' क्या है
'थिरू-नामम' माथे के मध्य पर लगने या बनाए जाने वाला निशान है। इसमें एक पतली लाइन ऊपर की ओर होती है और इसका आकार अंग्रेजी के लेटर u की तरह होता है। ये सफेद चंदन की मोटी रेखाओं से घिरा रहता है।

मंदिर के निर्देश के अनुसार कोई भी गैर हिंदू इस मंदिर में ना तो काम कर सकता है और ना ही किसी सर्विस का हिस्सा बन सकता है। इसके साथ ही अगर वो मंदिर में प्रवेश भी करना चाहते हैं तो उन्हें पहले हस्ताक्षर कर ये साबित करना होगा कि उनके मन में हिंदू भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा है।
1989 तक टीटीडी में भर्ती प्रक्रिया पर इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं था। 1989 से 2007 तक जो भी व्यक्ति हिंदू धर्म को खुलकर स्वीकार करता था उन व्यक्तियों की भर्ती गैर-शिक्षण श्रेणी में की जा सकती थी। 2007 में इस नियम में संशोधन किया गया। इस संशोधन के अनुसार गैर-हिंदुओं को टीटीडी की अध्यापन या गैर-शिक्षण श्रेणियों में भी नियोजित नहीं किया जा सकता।
टीटीडी जागरूकता एवं प्रवर्तन के मुख्य अधिकारी रविशंकर ने एक रिपोर्ट पेश की जिसके मुताबिक 44 गैर-हिंदू महिला और पुरुष कार्यरत पाए गए। ये महिलाएं और पुरुष मंदिर के विभिन्न विंगों में काम करते हैं। मुख्य अधिकारी अनिल कुमार सिंघल ने बताया कि 44 में 39 कर्मचारी 1989-2007 के बीच भर्ती हुए हैं। ये लोग बड़ी संख्या में दयालु वर्ग में कार्यरत हुए हैं।
गौरतलब है कि टीटीजी ने उन्हें आंध्र प्रदेश के अन्य सरकारी विभागों में बाकी कार्यकर्ताओं के समान भेजने की योजना बनाई है।
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