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दिवाली के बाद होगा डीएनडी का फैसला, ना वसूले टोल: सुप्रीम कोर्ट

साल 2001 में बने डीएनडी को बनाने का खर्च 407 करोड़ आया था।

दिवाली के बाद होगा डीएनडी का फैसला, ना वसूले टोल: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले डीएनडी को टोल लेने से मान करने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश जारी रहेगा। बता दें कि इस पर कोर्ट दिवाली के बाद फैसला सुनाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह तय करेंगे कि क्या सीएजी या किसी स्वतंत्र एजेंसी से इस मामले की जांच कराई जाए।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने सख्त टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि 10 किलोमीटर की सड़क को ऐसे बता रहे हैं, जैसे चांद तक की सड़क बनाई हो। कोर्ट ने कहा कि लोगों को इसलिए टोल देने को नहीं कह सकते कि वह फंड में जमा हो। कंपनी की दलील थी कि फिलहाल टोल वसूलने दें, यह फैसला आने तक फंड में जमा कर देंगे। कंपनी की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 1991-92 का है जब कंपनियां देश में आने को तैयार नहीं थीं।
1997 में MOU साइन हुआ। 2001 में यह शुरू हुआ। पिछले 6 साल से कंपनी घाटे में चल रही है। शर्त के मुताबिक, 20 फीसदी सालाना इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न यानी आइआरआर मिलना चाहिए या यह कॉन्ट्रेक्ट 30 साल चलेगा। हम इसकी जांच सीजीए या किसी एजेंसी से कराने को तैयार हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए दिल्ली-नोएडा डीएनडी फ्लाई ओवर को टोल-फ्री करने का आदेश दिया था। टोल वसूली के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर यह फैसला आया है। इस मामले में कई संगठनों ने प्रदर्शन किया था और कोर्ट में याचिका दायर की थी। गौरतलब है कि डीएनडी से हर दिन दो लाख गाड़िया गुजरती हैं। फरवरी 2001 से यह फ्लाईओवर शुरू हुआ था।
संगठनों का आरोप था कि 2000 करोड़ से ज्यादा की वसूली हुई है। इस दौरान टोल टैक्स बढ़कर करीब पांच गुना हुआ। अदालत ने लंबी बहस के बाद 8 अगस्त को निर्णय सुरक्षित कर लिया था। डीएनडी बनाने का खर्च 407 करोड़ आया था। संविदा की तय शर्तों के अनुसार कंपनी 2001 से टोल वसूली कर रही है और लागत बढ़कर पांच हजार करोड़ हो गई है।

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