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डीजीएमओ बातचीत के बाद रक्षा विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, कहा-''पाक पर भरोसा न करें''

अभी तक पाक सरकार के किसी नेता या प्रशासनिक मशीनरी से जुड़े किसी अन्य अधिकारी का कोई बयान नहीं आया है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में कब तक शांति रहेगी, कहना मुश्किल है।

डीजीएमओ बातचीत के बाद रक्षा विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, कहा-पाक पर भरोसा न करें
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सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान की ओर से की गई 2003 के सीजफायर समझौते को लागू करने की बात पर बिलकुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता है।दूसरे शब्दों में इसे युद्धविराम पर उसकी क्लियर लाइन भी नहीं माना जा सकता है। क्योंकि भारत से हुई पाक फौज के डीजीएमओ की बातचीत को चार दिन बीत चुके हैं।

अब तक इस पर उनकी सरकार के किसी नेता या प्रशासनिक मशीनरी से जुड़े किसी अन्य अधिकारी का कोई बयान नहीं आया है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में कब तक शांति रहेगी, कहना मुश्किल है। यह बात रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हरिभूमि से बातचीत के दौरान कही।

2003 और 2018 में बहुत फर्क

जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक तैनात रहे सेना के वरिष्ठ सेवानिवृत अधिकारी मेजर जनरल अफसर करीम ने कहा कि 2003 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम समझौता हुआ था। तब के हालात बिलकुल अलग थे।

तत्कालीन पाक राष्ट्रपति परवेज मुशरर्फ ने समझौते को लेकर बकायदा एक बयान दिया था। जिसे बाद में उनकी फौज ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अमलीजामा पहनाया था।

लेकिन आज सीजफायर की बात दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (डीजीएमओ) के बीच हुई है और अब तक पाक सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में सैन्य संवाद पर पूरा भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने कहा कि एलओसी पर गलती से भी एक गोली चलने पर फायरिंग शुरु हो जाती है। लेकिन जब राजनीतिक रुप से किसी देश का नेता सीजफायर पर कुछ बात कहता है।

तो उसकी सेना के जवानों को भी दिमाग और मन में शत-प्रतिशत पता होता है कि गोली नहीं चलानी है। हमें पूरी दुनिया देख रही है। लेकिन आज ऐसा कुछ भी नहीं है। अब तो पाक को केवल परखने की बारी है।

सीजफायर की आड़ में करगिल न हो जाए

सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बाना सिंह ने कहा कि फरवरी 1999 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी ने दिल्ली से लाहौर के बीच बससेवा की शुरुआत की थी।

इसके चंद महीनों के अंदर ही पाक ने जम्मू-कश्मीर के करगिल सेक्टर में जंग छेड़ दी थी। फिर 2003 में युद्धविराम समझौता करने के बावजूद भी भारतीय सेना की चौकियों पर अंधाधुंध गोलीबारी करना बंद नहीं किया। ऐसे में उसकी कथनी-करनी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

इसे एक अन्य तथ्य से भी समझा जा सकता है। जैसे सीजफायर के ऐलान के बाद बातचीत के वक्त पाक केवल कश्मीर का राग अलापता रहा है और अलापता ही रहेगा। इसमें कोई शक नहीं है। ऐसे में कब तब एलओसी से लेकर आईबी पर शांति रहेगी। कहना मुश्किल होगा।

उन्होंने कहा कि भारत ने बात करने की काफी कोशिश की है। प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आने के बाद पाक पीएम के घर भी गए। लेकिन इसके बाद भी उनकी सेना ने सीमा पर अपने विनाशक हथियारों से आग उगलना बंद नहीं किया। हमने रजमान के दौरान एकतरफा संघर्षविराम लागू किया।

लेकिन उन्होंने इसे भी मानने से इंकार कर दिया। ऐसे में अब उनपर कड़ी नजर रखना बेहद जरुरी है।

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