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नई वोटिंग मशीन पर राजनीतिक दल एक राय नहीं

चुनाव आयोग ने सरकार के पाले में डाली योजना

नई वोटिंग मशीन पर राजनीतिक दल एक राय नहीं
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नई दिल्ली. देश में चुनाव सुधार की दिशा में केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा मतदान की गोपनीयता मजबूत करने वाली नई वोटिंग मशीन की व्यवस्था पर राजनीतिक दल एक मत नहीं हैं। अब आयोग ने इस मामले को केंद्र सरकार के पाले में ड़ाल दिया है।
दरअसल केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा अगस्त 2014 में ऐसा एक प्रस्ताव केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को सौंपा था, जिसमें मतों का एक साथ योग करने वाली नई ‘टोटलाइजर मशीन’ का इस्तेमाल करने की योजना को आगे बढ़ाया जा सके। पिछले महीने ही इस प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के आधार प्रधानमंत्री कार्यालय के निदेर्शों पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय दल का गठन किया गया था। इस दल में वित्त मंत्री अरूण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद शामिल हैं।
इस दल को केंद्रीय मंत्रिमंडल को इस संदर्भ में सिफारिश देनी हैं कि मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं? वहीं चुनाव आयोग के विभिन्न दलों से किये गये विचार विमर्श के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसमें राजनीतिक दल बंटे नजर आने की जानकारी मंगलवार को चुनाव आयोग ने कानून मंत्रलाय को दी। यह योजना मंत्रियों के दल के समक्ष रखे गये दस्तावेजों का ही हिस्सा है, जो ‘टोटलाइजर’ मशीन के पक्ष में है। लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के आधार पर ही लिया जाएगा। गौरतलब है कि इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में अगली सुनवाई फरवरी 2017 में होनी है।
चुनाव आयोग का तर्क
इस प्रस्ताव में चुनाव आयोग का तर्क है कि इस तरह की मशीन के इस्तेमाल से मतदान की गोपनीयता का स्तर बढ़ेगा और मतदान के समय पूरे मतों को एक साथ मिलाना भी संभव होगा। इससे इसका खुलासा नहीं हो सकेगा कि किसी मतदान केंद्र पर किस ढर्रे पर मतदान हुआ है। गौरतलब है कि उधर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर इस माह के अंत तक फैसला करने के लिए कहा था। इसलिए सरकार ने मंत्रियों के एक दल का गठन किया।
इन दलों ने किया समर्थन
चुनाव आयोग द्वारा ‘टोटलाइजर’ मशीनों के इस्तेमाल समेत चुनाव सुधार पर चर्चा करने के लिए आयोजित मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के दलों की बैठक का हवाला देते हुए बताया कि कांग्रेस, राकांपा, बसपा, माकपा और आप ‘टोटलाइजर’ मशीनों के इस्तेमाल का समर्थन किया है। जबकि सत्ताधारी भाजपा ने मंत्रियों के दल की हां के बावजूद तर्क दिया है कि मतदान केंद्र का प्रबंधन करने के लिए राजनीतिक दलों को प्रत्येक केंद्र आधारित प्रदर्शन के बारे में जानना जरूरी होता है। जबकि भाकपा ने इस नयी मशीन के इस्तेमाल के बारे में कोई विशेष जानकारी या राय नहीं दी। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का दर्जा हासिल करने वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस नई मशीन के इस्तेमला का विरोध किया है।
यह था प्रस्ताव
चुनाव आयोग का अगस्त 2014 में प्रस्ताव है कि वित्त वर्ष 2014-15 और 2018-19 के बीच 9,30,430 कंट्रोल यूनिट और 13,95,647 बैलट यूनिट खरीदी जाएं। ईवीएम प्रणाली में अधिकतम चार बैलट यूनिट और एक कंट्रोल यूनिट होती है। दोनों एक केबल के जरिए आपस में जुड़ी होती हैं। खरीद के इस प्रस्ताव के संदर्भ में विधि मंत्रालय को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी।

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