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SC में एक भी मुस्लिम जज नहीं

केन्द्र सरकार से गतिरोध के कारण अटकी है नए जजों की नियुक्ति

SC में एक भी मुस्लिम जज नहीं
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नई दिल्ली. पिछले 11 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट में कोई मुस्लिम जज नहीं है। उच्चतम अदालत के दो मुस्लिम जज इस साल रिटायर हो गए। पिछले करीब तीन दशकों में ऐसा दूसरी बार हुआ है कि देश की सर्वोच्च अदालत में कोई मुस्लिम जज नहीं है।
आखिरी बार 2012 में किसी मुस्लिम जज की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हुई थी। जस्टिस एम वाई इकबाल और जस्टिस फकीर मोहम्मद 2012 में सुप्रीम कोर्ट में जज बनें थे। दोनों ही इस साल सेवानिवृत्त हो गए। सुप्रीम कोर्ट और केन्द्र सरकार के बीच उच्चतम न्यायालय में जजों की नियुक्ति को लेकर गतिरोध जारी रहने के कारण नई नियुक्ति में वक्त लग रहा है।
जजों की नियुक्ति न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच उच्चतम न्यायालय में जजों की नियुक्ति को लेकर गतिरोध जारी रहने के कारण नई नियुक्ति में वक्त लग रहा है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के प्रति अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। वहीं समय-समय पर भारत के मुख्य न्यायधीश ने कई मंचों पर इसको लेकर सरकार से आग्रह भी किया है।
दो हाईकोर्ट में मुस्लिम मुख्य न्यायधीश
अभी देश के दो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुस्लिम हैं। असम के रहने वाले जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी अगले साल अक्टूबर में रिटायर होंगे। जम्मू-कश्मीर के रहने वाले सी जे मंसूर अहमद मीर हिमाचल प्रदेश होई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश है। जस्टिस मीर अप्रैल में 2017 में रिटायर होंगे।
हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 साल और सुप्रीम कोर्ट के जजों की 65 साल है। सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम 31 जजों की नियुक्ति हो सकती है। उच्चतम अदालत में फिलहाल 28 जज ही हैं। इस साल के अंत तक चार अन्य जज जस्टिस वी गोपाल गौड़ा,जस्टिस चोकलिंगम,जस्टिस शिवकीर्ति सिंह, जस्टिस अनिल आर दवे रिटायर हो जाएंगे।

पहले भी हुआ है ऐसा
इससे पहले अप्रैल 2003 से सितंबर 2005 तक सुप्रीम कोर्ट में कोई भी मुस्लिम जज नहीं था। दिसंबर 1988 के बाद ऐसा पहली बार हुआ था कि उच्चतम अदालत में कोई मुस्लिम जज नहीं था। 9 सितंबर 2005 को जस्टिस अलतमस कबीर की सर्वोच्च अदालत में नियुक्ति हुई थी। दिसंबर 2012 से अप्रैल 2013 के बीच सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश अलतमस कबीर, जस्टिस आफताब आलम, जस्टिस इकबाल और जस्टिस कैफुल्लाह के तौर पर चार मुस्लिम जज थे।
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