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सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्‍यायाधीश ने कहा, न्‍यायपालिका की स्‍वतंत्रता के साथ नहीं हो सकता कोई समझौता

जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि कभी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिसकी वजह से न्यायापालिका में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता हो।

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्‍यायाधीश ने कहा, न्‍यायपालिका की स्‍वतंत्रता के साथ नहीं हो सकता कोई समझौता
नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा ने रूल ऑफ लॉ कनवेंशन 2014 विषयक सेमिनार में जोर देकर कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कोई समझौता नहीं हो। उन्‍होंने कहा कि न्‍यायपालिका के पास किसी भी तरह के हस्तक्षेप को विफल करने की क्षमता निहित है। उच्च न्यायिक नियुक्तियों के लिए न्यायाधीशों के निर्णायक मंडल की प्रणाली समाप्त करने की दिशा में उठाए गए कदमों की पृष्ठभूमि में न्यायमूर्ति लोढ़ा ने हालांकि संसद की ओर से पारित कानून का प्रत्यक्ष जिक्र नहीं किया लेकिन यह जरूर कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को छीनने का कोई प्रयास सफल नहीं होगा।
सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए न्यायिक स्वतंत्रता जरूरी है और यह एक संस्था है जो कार्यपालिका या किसी और की ओर से किए गए गलत कार्यों के मामले में उनकी मदद करती है। जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि कभी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिसकी वजह से न्यायापालिका में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता हो। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोगों के जहन में न्यायापालिका की बेहद पाक-साफ छवि इस वजह से है क्योंकि यहां पर उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद होती है।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए,बनाए रखना होगा जनता का विश्‍वास: चीफ जस्टिस लोढ़ा-

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