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अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 19 2018 6:12PM IST
अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास

संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है, इसी बीच सदन में सत्ताधारी पार्टी भाजपा के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की मांग रखी है। और यही नहीं विपक्ष का साथ देने के लिए कुछ पार्टियों का समर्थन भी हासिल कर लिया। जबकि सरकार का विरोध कर रही पार्टियों को यह बात अच्छे से पता है कि भाजपा के पास सदन मे पूर्ण बहुमत है। फिर  भी इस तरह की हरकत विपक्ष के कामकाज पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

ऐसा भी नही है कि यह सदन के इतिहास में पहली बार हो रहा है, आपको बता दें कि अब तक सदन में कुल 26 बार अविश्वास प्रस्ताव पारित हो चुका है। लेकिन अब तक सिर्फ दो बार ही विजय मिली है। फिलहाल भाजपा सरकार के पास पर्याप्त सीट है।

आजाद भारत की संसद में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव 1963 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ आया था। नेहरू के खिलाफ जेबी कृपलानी ने अविश्वास प्रस्ताव रखा था।बाद में जेबी कृपलानी ने पार्टी छोड़कर किसान मजदूर प्रजा पार्टी की स्थापना की जो बाद में सोशलिस्ट पार्टी के साथ मिलकर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में परिवर्तित हो गई।

नेहरू सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 62 वोट और विरोध में 347 वोट पड़े। इस तरह से ये अविश्वास प्रस्ताव असफल हो गया।

जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री बने। उनके कार्यकाल में विपक्ष के द्वारा तीन बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, लेकिन विपक्ष को सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद प्रधानमंत्री की कमान इंदिरा गांधी को मिली।इस दौरान उनके खिलाफ दो बार प्रस्ताव लाया गया।

भारतीय संसदीय इतिहास में सबसे ज़्यादा अविश्वास प्रस्ताव का सामना प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को करना पड़ा है. इंदिरा गांधी के खिलाफ विपक्ष 15 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया, पर एक भी बार उसे कामयाबी नहीं मिली.

सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का रिकॉर्ड मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद ज्योति बसु के नाम है। उन्होंने अपने चारों प्रस्ताव इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ रखे थे।

आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी को बहुमत मिला और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।  मोरारजी देसाई सरकार के कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को सफलता 1978 में मिली। अपनी हार का अंदाजा लगते ही मोरारजी देसाई ने मत-विभाजन से पहले ही इस्तीफा दे दिया।

नरसिम्हा राव की सरकार को भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा।  नरसिम्हा सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव के वोटिंग में 14 वोट के अंतर से सरकार बची।

एनडीए सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष में रहते हुए दो बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। वाजपेयी जब खुद प्रधानमंत्री बने तो उन्हें भी दो बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा। इनमें से पहली बार तो वो सरकार नहीं बचा पाए लेकिन दूसरी बार विपक्ष को उन्होंने हरा दिया।

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