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नहीं मिली एंबुलेंस, महिला की लाश को तोड़कर पहुंचाया अस्पताल

महिला के मृत शरीर को कार्यकर्ताओं ने बड़ी ही क्रुरता के साथ कूल्हे की जगह से तोड़ दिया।

नहीं मिली एंबुलेंस, महिला की लाश को तोड़कर पहुंचाया अस्पताल
नई दिल्ली. ओडिशा से पिछले दो दिनों में ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे मानवता को शर्मसार कर दिया है। पहली तस्वीर बुधवार को सामने आई थी जिसमें कालाहांडी का एक आदिवासी अपने कंधों पर अपनी पत्नी के मृत शरीर को ले जाने के लिए विवश था। उस आदिवासी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पत्नी को किसी गाड़ी में ले जा सके और अस्पताल के अधिकारियों ने भी कथित तौर पर उसे एंबुलेंस देने से मना कर दिया था।
दूसरी तस्वीर ओडिशा के बालासोर जिले की है जो गुरुवार को सामने आई जिसमें अस्पताल के कुछ कर्मचारी एक औरत के शरीर पर खड़े होकर उसकी हड्डियों को तोड़ रहे हैं और फिर उसके शरीर को एक चादर में लपेटकर एक बांस में टांगकर ले गए।
आपको बता दें, बालासोर जिले में बुधवार सुबह एक 80 वर्षीय विधवा महिला सलामनी बेहरा का सोरो रेलवे स्टेशन के पास मालगाड़ी के नीचे आने से मौत हो गई थी जिसके बाद उसके मृत शरीर को सोरो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के लिए ले जाया गया था।
हालांकि इस घटना की जानकारी राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को सूचित कर दिया गया था। सूचना मिलने के बाद भी जीआरपी के अधिकारी अस्पताल में शाम को लगभग 12 घंटे बाद पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए बालासोर जिला अस्पताल में ले जाया जाना था, लेकिन कोई एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोरो जीआरपी सहायक उप निरीक्षक प्रताप रुद्र मिश्रा ने कहा कि उन्होंने एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर से पूछा कि वह शव को रेलवे स्टेशन तक ले चले ताकि इसे बालासोर के लिए ट्रेन से भेजा जा सके। रेलवे स्टेशन से बालासोर की दूरी 30 किमी है। रुद्र मिश्रा ने कहा, 'लेकिन ऑटो चालक 3,500 रुपए मांग रहा था लेकिन हम इस तरह के उद्देश्यों के लिए अधिक से अधिक 1000 रुपए से ज्यादा खर्च नहीं कर सकते हैं। मेरे पास कोई अन्य विकल्प नहीं था लेकिन सोहो सीएचसी के ग्रेड चतुर्थ के कुछ कार्यकर्ताओं से मैंने कहा कि वो शव को ले चले।'
देरी के कारण कार्यकर्ताओं ने बड़ी ही क्रुरता के साथ महिला के मृत शरीर को कूल्हे की जगह से तोड़ दिया फिर उसके बाद शरीर को एक पुराने चादर में लपेटकर एक बांस की पोल से बांध कर वहां से दो किमी दूर रेलवे स्टेशन ले गए। मृत शरीर को फिर ट्रेन से बालासोर के लिए ले जाया गया।
बेहरा के बेटे रवींद्र बारिक ने कहा कि मैं अपनी मां के शरीर के साथ ऐसा बर्ताव सुनने के बाद चौंक गया था। उनमें थोड़ी तो मानवता होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, 'मैंने शुरू में पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दायर करने के बारे में सोचा। लेकिन कौन हमारी शिकायत पर कार्रवाई करेगा।'
मामले की स्वत: संज्ञान नोटिस लेते हुए गुरुवार को ओडिशा के मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष बीके मिश्रा महानिरीक्षक ने जीआरपी और बालासोर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी किया है, उन्हें घटना की जांच के आदेश और चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
इस बीच, कालाहांडी जिला प्रशासन ने गुरुवार को हुई घटना पर जांच के आदेश दिए हैं। आपको बता दें, दाना मांझी जो कालाहांडी का आदिवासी आदमी है जिसे कथित तौर पर अस्पताल के द्वारा एंबुलेंस नहीं दी गई थी जिसके बाद उसे अपनी पत्नी के मृत शरीर को लगभग 12 किमी तक अपने कंधों पर उठा कर चलना पड़ा था। जांच रिपोर्ट शाम को प्रस्तुत की गई जिसमें अस्पताल के अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी है।
घटना से शर्मिंदा, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 30 जिला अस्पतालों और तीन मेडिकल कॉलेजों में एक नि:शुल्क रथी/एम्बुलेंस वैन महाप्रयाण योजना का शुभारंभ किया है।
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