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अब बस चलाने के लिए होगा जैव ईंधन का इस्तेमाल, जानें क्या है ये

नितिन गडकरी ने कहा कि देश में जल्द ही बिजली और बायोफ्यूल से बसों को चलाया जाएगा।

अब बस चलाने के लिए होगा जैव ईंधन का इस्तेमाल, जानें क्या है ये
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केंद्र सरकार देश में ट्रांस्पोर्टेशन में और सुधार करने के लिए अब जैव ईंधन (बायोफ्यूल) का इस्तेमाल करने जा रही है। इसको लेकर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी इसको लेकर ऐलान किया है।

नितिन गडकरी ने मीडिया ब्रिफिंग के दौरान कहा कि हम योजना बना रहे है कि जल्द ही बिजली से चलने वाली बस और जैव ईँधन से चलने वाली बसों को लाया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि हम पब्लिक ट्रांस्पोर्ट को बढ़ावा देना चाहते हैं।

इसके लिए इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल किया जाएगा। नितिन गडकरी ने कहा कि हम ट्रांस्पोर्ट विभाग में बुनियादी सुधार की कोशिश कर रहे हैं।

क्या होता है जैव ईंधन

बता दें कि फसलों, पेडों, पौधों, गोबर, मानव-मल आदि जैविक वस्तुओं होती है जिन्हें जैव ऊर्जा कहते हैं। इनका प्रयोग करके उष्मा, विद्युत या गतिज ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है।

जैव ईंधन ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जिसका देश के कुल ईंधन उपयोग में एक-तिहाई का योगदान है और ग्रामीण परिवारों में इसकी खपत लगभग 90 प्रतिशत है। जैव ईंधन का व्यापक उपयोग खाना बनाने और उष्णता प्राप्त करने में किया जाता है।

जानकारी के लिए बता दें कि भारत में जैव ईंधन की वर्त्तमान उपलब्धता लगभग 120-150 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जो कृषि और वानिकी अवशेषों से उत्पादित है और जिसकी ऊर्जा संभाव्यता 16,000 मेगा वाट है।

जैव वस्तुओं को एनारोबिक डायजेशन के माध्यम से बायोगैस में रूपांतरित करना जो न केवल ईंधन की आवश्यक्ताओं को पूरा करता है बल्कि खेतों को घुलनशील खाद भी उपलब्ध कराता है।

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