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नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बनाया ये पूरा प्लान, पढें

निर्मला सीतारमण ने कहा कि वे रक्षा मंत्री के तौर पर सेनाओं के आधुनिकिरण और सैनिकों के कल्याण के लिए काम करेंगी।

नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बनाया ये पूरा प्लान, पढें

निर्मला सीतारमण के रक्षा मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यह उम्मीद जताई है कि भविष्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के लिए ओएफबी और डीपीएसयू द्वारा की जाने वाली रक्षा उपकरणों की सप्लाई तय समयसीमा के अंदर हो सकेगी।

इसमें अकसर होने वाली देरी की घटनाओं में अब कमी देखने को मिलेगी। यह बातें गृहमंत्री ने गुरुवार को ओएफबी, डीपीएसयू द्वारा बनाए गए कुछ प्रमुख रक्षा उत्पादों को सीएपीएफ को सौंपने के लिए आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में कही।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह सैन्य क्षेत्र में मेक इन इंडिया की तर्ज पर बनाए गए वह चुनौतीपूर्ण उपकरण हैं, जिनसे मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों में सशस्त्र बलों को देश की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी।

खरीद के लिए बने नया तंत्र

राजनाथ ने कहा कि सीएपीएफ को मिलने वाले रक्षा उपकरणों की खरीद रक्षा मंत्रालय से करनी होती है। इसमें कई बार देरी से उपकरण मिलते हैं। इससे काफी परेशानी होती है। मुझे लगता है कि पूर्णकालिक रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण इस पर विचार करेंगी।

साथ ही इस विषय पर एक नया तंत्र भी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर बैठकर किसी को आतंकी बनाया जा सकता है, हैकिंग की जा सकती है। ऐसे हालात में इन चुनौतियों से निपटने के लिए हमें तकनीक के मामले में पूर्ण रूप से तैयार होना पड़ेगा।

सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से हमारा आयात बढ़ रहा है। लेकिन डीपीएसयू इसमें कमी लाने की दिशा में काम कर रही हैं। लेकिन अगर वह मेक इन इंडिया पर जोर देंगे, तो आयात पर निर्भरता घटेगी। अभी सामरिक उपकरणों में 60 फीसदी स्वदेशी तत्व है। इसे 100 फीसदी करने की दिशा में डीपीएसयू को कदम बढ़ाने चाहिए।

सौंपे गए उपकरणों की सूची

बुलेटप्रूफ जैकेट- इस जैकेट को भाभा कवच नाम दिया गया है। इसे मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानी), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (मुंबई) ने मिलकर तैयार किया है। इसका वजन 7.1 किलोग्राम है और इसमें 60 फीसदी स्वदेशी तत्व है।

इसका प्रयोग सशस्त्र बल जम्मू-कश्मीर के अलावा आतंरिक सुरक्षा के मोर्चों पर जंग लड़ने के दौरान करेंगे। राजनाथ ने कहा कि इनका वजन ज्यादा है। यह और हल्की बनाई जा सकती हैं। बुलेटप्रूफ पटका यानि हैलमेट का वजन 14 किलोग्राम है। इसे भी हल्का होना चाहिए। अभी सीएपीएफ को 20 हजार हैलमेट दिए जा चुके हैं।

आर्मड बस- यह 52 सीटों वाली बुलेटप्रूफ गाड़ी है। इसका वजन 3 हजार 300 किलोग्राम है। इसमें एक खास किस्म का शीशा, स्टील लगाया गया है। इसका इस्तेमाल सीआरपीएफ जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में सुरक्षित आवागमन, आतंकियों की गोलीबारी व उनके द्वारा घात लगाकर हमला करने से बचने के लिए सुरक्षा कवच के रूप में करेगी। इसमें 80 फीसदी तत्व स्वदेशी है। इसे मिधानी ने तैयार किया है।

मिनी यूएवी मार्क-3- इसे एचएएल, एआरडीसी ने बनाया है। इसका वजन 9 किलोग्राम है। यह दुर्गम व कम ऊंचाई वाले इलाकों में सीमा से 15 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। उनकी तस्वीरें ले सकता है, वीडियो भेज सकता है।

यह 90 मिनट तक हवाई निगरानी करने में सक्षम है। 60 फीसदी स्वदेशी तत्व है। ऑल टैरेन विहिकल- सीआरपीएफ, बीएसएफ के लिए बनाया गया है। हर तरह के भूभाग पर काम करने में सक्षम है। जम्मू-कश्मीर में जंग जैसे हालातों में इसका इस्तेमाल करने से नुकसान कम होगा। इसे बीईएमएल ने बनाया है।

असॉल्ट, घातक बंदूक- इसे ओएफबी, एआरडीई ने सीआरपीएफ के लिए बनाया है। इस साल सीआरपीएफ को 100 घातक इंसास बंदूकें दी जा चुकी हैं। इनकी रेंज 550 मीटर, वजन 3.8 किलोग्राम है।

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