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राफेल डील : संसद में टिक नहीं पाए मनगढ़ंत आरोप

राफेल डील (Rafale Deal) के बारे में संसद (Parliament) में परत दर परत जानकारी देकर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण (Defence Minister Nirmala Sitharaman) ने आवाम के सामने इस सौदे की सच्चाई को रखा है। लोकसभा (Lok Sabha) में निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के जवाब से अब राफेल (Rafale) पर हो रही राजनीति पर विराम लगना चाहिए।

राफेल डील : संसद में टिक नहीं पाए मनगढ़ंत आरोप
राफेल डील (Rafale Deal) के बारे में संसद (Parliament) में परत दर परत जानकारी देकर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण (Defence Minister Nirmala Sitharaman) ने आवाम के सामने इस सौदे की सच्चाई को रखा है। लोकसभा (Lok Sabha) में निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के जवाब से अब राफेल (Rafale) पर हो रही राजनीति पर विराम लगना चाहिए।
कांग्रेस (Congress) का सारा झूठ बेनकाब हो गया है। अब यह साफ हो गया है कि करीब एक साल से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) राफेल सौदे (Rafale Deal) को लेकर देश को गुमराह कर रहे हैं और एक के बाद एक गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। रक्षामंत्री ने बहुत ही बारीकी से विपक्ष के सभी आरोपों का जवाब दिया है।
उन्होंने कहा कि फ्रांस (France) के साथ राफेल डील में सभी सरकारी प्रक्रिया पूरी की गई है। यूपीए के समय से 9 फीसदी सस्ते में डील हुई है। एचएएल (HAL) के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ। सुप्रीम अदालत (Supreme Court) इस डील की प्रक्रिया को पाक-साफ बता चुकी है। बेसिक प्राइस कांग्रेस के वक्त 737 करोड़ रुपये थी, जबकि एनडीए के समय 670 करोड़ रुपये है।
526 से 560 करोड़ रुपये की जिस प्राइस का राग कांग्रेस अलाप रही है, उसका कहीं कोई सोर्स नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) बार-बार झूठ बोल रहे हैं, पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं और कांग्रेस देश की आंख में धूल झोंक रही है।
रक्षा मंत्री (Defence Minister) ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस की सरकार वायुसेना (Air Force) की जरूरत के प्रति इतना ही गंभीर थी, तो अपने दस साल के शासनकाल में डील क्यों नहीं की? डील सस्ती थी तो कांग्रेस सरकार ने फाइनल क्यों नहीं की? हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को लेकर भी कांग्रेस केवल घड़ियाली आंसू बहा रही है।
अगर एचएएल कॉम्पीटेंट थी तो अगस्ता वेस्टलैंड से हेलीकॉप्टर डील कांग्रेस सरकार ने क्यों की, एचएएल को यह काम क्यों नहीं दिया गया? संसद में रक्षा मंत्री के इस जवाब के बाद कांग्रेस को अपने सभी आरोपों का उत्तर मिल गया होगा, उनके मनगढ़ंत आरोप संसद में टिक नहीं पाए हैं।
हकीकत यही है कि देश की वायुसेना को राफेल (Rafale Fighter Plane) जैसे हाईटेक मॉडर्न फाइटर प्लेन चाहिए। सरकार का दायित्व है कि वह मुहैया कराए। रक्षा सौदे पर इस तरह की छिछली राजनीति होगी तो इससे देश की छवि ही खराब होगी। कांग्रेस को देखना चाहिए कि उसकी सरकार के समय हुए रक्षा सौदे के दामन कितने साफ थे?
बोफोर्स सौदे में घोटाला सामने आया, जिसमें सीधे राजीव गांधी का नाम आया था व 64 करोड़ घूस के आरोप लगे। अगस्ता वेस्टलैंड में 3600 करोड़ रुपये घोटाले की जांच चल रही है, जिसमें उंगली गांधी परिवार पर उठ रही है। इसके अलावा टूजी, कोलगेट, आदर्श सोसायटी, राष्ट्रमंडल खेल आदि घोटाले यूपीए सरकार के समय आए जब राहुल गांधी खुद कांग्रेस में सक्रिय थे।
तब कांग्रेस सांसद के तौर पर राहुल क्या कर रहे थे? उससे पहले भी पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय जीप घोटाले से लेकर डा. मनमोहन सिंह के वक्त एस-बैंड स्पेक्ट्रम तक सैकड़ों घोटाले कांग्रेस शासन के दौरान हुए। कांग्रेस और भ्रष्टाचार पर्याय बन गए थे। घोटालों के चलते ही जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया।
राफेल सौदे (Rafale Deal) को लेकर कांग्रेस व उसके अध्यक्ष राहुल गांधी को कुछ भी आरोप लगाने का नैतिक हक नहीं है। झूठ बोलकर देश को बरगलाने की बजाय राहुल गांधी को कांग्रेस से भ्रष्टाचार संस्कृति की सफाई के लिए काम करना चाहिए।
सरकार को भी रक्षा सौदे की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए ताकि न ही किसी को इस तरह की ओछी राजनीति करने का मौका मिले व न ही संसद का समय जाया हो। अच्छा तो यह होगा कि केवल हम तकनीक हासिल करें और सभी रक्षा निर्माण स्वदेश में ही हों।
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