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भारत ने अमेरिका को रणनीतिक संबंधों की दिलाई याद, वार्ता में ये शर्तें रखेगा भारत

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो, रक्षा मंत्री जिम मैटिस और भारत में उनकी समकक्ष सुषमा स्वराज व निर्मला सीतारमण के बीच रणनीतिक रूप से अहम द्विपक्षीय बातचीत होनी है।

भारत ने अमेरिका को रणनीतिक संबंधों की दिलाई याद, वार्ता में ये शर्तें रखेगा भारत
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रूस के साथ S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के बीच भारत ने अमेरिका को रणनीतिक संबंधों की याद दिलाई है। अमेरिका के साथ गुरुवार को प्रस्तावित द्विपक्षीय डायलॉग के महत्व को स्वीकार करते हुए भारत ने कहा है कि ईरान के साथ तेल आयात पर अमेरिका के दबाव में काम करने की किसी तरह की कोई बाध्यता नहीं है।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, रक्षा मंत्री जिम मैटिस और भारत में उनकी समकक्ष सुषमा स्वराज व निर्मला सीतारमण के बीच रणनीतिक रूप से अहम द्विपक्षीय बातचीत छह सितंबर को होनी है।

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इस बातचीत के संबंध में आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका हमारे साथ चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को नहीं भूलेगा। उन्होंने वार्ता को इस साल भारत में होने वाले सबसे अहम रणनीतिक बातचीत भी माना।

यह बहुप्रतिक्षित वार्ता तब होने जा रही है जब भारत पर अमेरिकी प्रतिबंध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के साथ तेल आयात और रूस के साथ 6 अरब डॉलर के रक्षा सौदे को लेकर सामने आया है।

अमेरिकी संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जोसेफ डनफोर्ड भी 2 + 2 मीटिंग के लिए आने वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। भारत ने अमेरिका के दबाव के बावजूद रूस के साथ S-400 खरीद की डील पर आगे बढ़ने का फैसला लिया है। उम्मीद की जा रही है कि ये दोनों मुद्दे इस वार्ता के अहम हिस्से होंगे।

अमेरिका के सामने ये मुद्दें रखेगा भारत

6 सितंबर को इस खास बातचीत में ईरान के साथ तेल आयात से जुड़े मुद्दे पर अमेरिका के सामने तीन बिंदु रखे जाएंगे। पहला यह कि भारत अपनी 83 फीसदी ऊर्जा जरूरतों को आयात के जरिये पूरा करता है। इसमें से भी 25 फीसदी क्रूड ईरान से आयात किया जाता है। दूसरा यह कि भारत ने क्रूड आयात पर अमेरिका से दूसरे सस्ते-व्यवहारिक चीजों पर सुझाव मांगा है।

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समझौता पर सहमति होने पर भारत को मिल सकेगी US की अत्याधुनिक मिलिटरी तकनीक

कूटनीतिक बातचीत में भारत की यह पोजिशनिंग 2015 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2231 के अनुरूप ही है। गुरुवार को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय बातचीत के बाद कम्युनिकेशंस, कॉम्पैटिबिलिटी ऐंड सिक्यारिटी अग्रीमेंट (COMCASA) पर हस्ताक्षर होगा या नहीं माना जा रहा है कि अगर समझौते पर सहमति बनती है तो इस अग्रीमेंट को सपॉर्ट की घोषणा की जा सकती है।

इस अग्रीमेंट से भारत को अमेरिका से इंक्रिप्टेड सिक्यॉर कम्युनिकेशन टेक्नॉलजी मिल जाएगी। इसके अलावा भारत की पहुंच अमेरिका की अत्याधुनिक मिलिटरी टेक्नॉलजी तक भी होगी जिसमें युद्धक प्रिडेटर ड्रोन भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक इस बातचीत में भारत सरकार जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर चतुर्भुजीय हिंद-प्रशांत रणनीति को भी ज्यादा तवज्जो नहीं देगी।

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हिंद-प्रशांत की नई रणनीति पर कोई बातचीत नहीं

भारत नहीं चाहता है कि इसे ग्रेट स्ट्रैटिजिक गेम प्लान के तौर पर देखा जाए। भारत की संपूर्ण सुरक्षा के संदर्भ में हिंद-प्रशांत कोई मैकनिज्म नहीं बल्कि एक नई विचार अवधारणा है। भारत के लिए हिंद महासागर एक खुला और समावेशी क्षेत्र है। इस बातचीत के दौरान आतंकवाद पर भी चर्चा होगी।

इस बातचीत के दौरान अमेरिका भारत को रक्षा संबंधी क्षेत्र में सहयोग करने पर भी अहम विचार विमर्श करेंगा। इस बातचीत से भारत अमेरिका के रक्षा क्षेत्र में रिश्तें मजबूत होने के करीब होंगे।

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