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अब बच्चों की किताबों में होगा यौन शोषण का सबक, गुड टच, बैड टच का फर्क बताया जाएगा

बढ़ते यौन शोषण के मामले के मद्दनजर एनसीईआरटी ने यह कदम उठाया है।

अब बच्चों की किताबों में होगा यौन शोषण का सबक, गुड टच, बैड टच का फर्क बताया जाएगा

बच्चों के साथ लगातार बढ़ रहे यौन शोषण के मामलों के मद्देनजर एनसीईआरटी नया कदम उठाने जा रहा है।

एनसीईआरटी चाहता है कि छात्रों की किताबों में 'गुड टच और बैड टच' के बीच का अंतर पहचानें और उन्हें किताबों में यह पढ़ाया जाए कि यौन शोषण का सामना करने पर उन्हें क्या करना चाहिए।

स्कूल पाठ्यक्रमों और पुस्तकों पर केंद्र और राज्य सरकार को सुझाव देने वाले राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने कहा कि अगले सत्र से उसकी सभी किताबों में ऐसे मामलों से निपटने के लिए क्या करना चाहिए, इसकी एक सूची होगी।

सुझाव में 'पोक्सो कानून और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग 'एनसीपीसीआर' के बारे में जानकारी देने की भी बात की गई। साथ ही किताबों में कुछ हेल्पलाइन नंबर भी दिए जाएंगे।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सुझाव स्वीकृत

एनसीईआरटी निदेशक ने कहा, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सुझाव के साथ उनसे संपर्क किया और हमने उसे स्वीकार कर लिया है।

शिक्षकों को गुड और बैड टच के बीच अंतर बताने के लिए छात्रों को शिक्षित करने की कोशिश करनी चाहिए लेकिन अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षक भी अकसर इस बात से अनजान रहते हैं कि ऐसी स्थितियों में क्या करना चाहिए।

किताबों के पीछे आसान भाषा में होंगे कुछ दिशा निर्देश

एनसीईआरटी निदेशक ने बताया कि अगले सत्र से सभी किताबों के पीछे वाले कवर के अंदर आसान भाषा में कुछ दिशा निर्देश होंगे।

इसमें छूने के अच्छे और बुरे तरीके के बारे में कुछ चित्र भी होंगे। दरअसल, गुरुग्राम के एक प्राइवेट स्कूल में सात साल के छात्र की हत्या की हत्या हो गई थी।

जिसके बाद स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। यहां तक कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। जिसके बाद एनसीईआरटी ने ये कदम उठाया है।

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