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कालाधन बैंक में जमा करने के लिए लोगों को डरा रहे हैं नक्सली

नक्सलियों के पास है काले धन का भंडार

कालाधन बैंक में जमा करने के लिए लोगों को डरा रहे हैं नक्सली
नई दिल्ली. देश में नोटबंदी ने न केवल आम लोगों को परेशान कर रखा है बल्कि नक्सली भी परेशान हो रहे हैं। आम लोग तो फिर भी लाइन में लगकर अपने पैसे जमा और बदलवा रहे हैं, लेकिन नक्सली अपने पास पड़े पैसों का करें तो करें क्या? एबीपी न्यूज के मुताबिक नोटबंदी के कारण नक्लियों की कमर टूट चुकी है। नक्सली अब लोगों को डरा धमका कर अपना काला बैंक में जमा कराने के लिए दवाब डाल रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही कहा था कि 500 और हजार का नोट बंद होने से आतंकवाद और जाली नोट पर लगाम लगेगी। नोटबंदी के फैसले के बाद से नक्सलियों में खलबली मच गई है। इसके साथ ही इस बात को का एहसास भी होता जा रहा है कि वाकई ही नोटबंदी से नक्सली और देश के दूसरे दुश्मनों की कमर टूट चुकी है।
इन राज्यों में डरा रहे हैं लोगों को नक्सली
सुऱक्षा एजेंसियों के सूत्र बता रहे हैं कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सली काले धन को बैंक में जमा करवाने के लिए लोगों को डरा धमका रहे हैं। नक्सली आम लोगों को अपने नोटों को देकर बैंक में जमा कराने का दवाब बना रहे हैं। जनधन खातों के साथ-साथ पेंशन से जुड़े खातों में पैसे जमा करने की साजिश हो रही हैं।
नक्सलियों के पास है काले धन का भंडार
अवैध वसूली के जरिए नक्सलियों के पास काफी पैसा इकट्ठा है और ऐसे में सरकार के फैसले से अब वो नोट बदलने के लिए लोगों को परेशान कर रहे हैं। ऐसी खबर आने के बाद सुरक्षा एजेसियां भी चौकन्नी हो गई है। जो ऐसे लोगों पर नजर रख रही हैं जो बड़ी मात्रा में बैंक में पैसा जमा कर रहे हैं। झारखंड में पुलिस ने शक के आधार पर कुछ लोगों पर कारवाई भी की है।
20 राज्यों में नक्सलियों का आतंक
2014 में संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक नक्सलियों की एक साल की कमाई 140 करोड़ से ऊपर की है, इसमें ज्यादा हिस्सा कैश का है। देश के बीस राज्यों में करीब 200 जिलों में नक्सलियों का खौफ है। देश विरोधी गतिविधियों के लिए नक्सली ज्यादातर लोगों से वसूली करके ही पैसा जमा करते हैं और इसे ज्यादातर जंगलों में जमीन के नीचे दबाकर रखते हैं। जाहिर है कि नोटबंदी के बाद नक्सलियों के इस कालेधन पर आफत आ गई है।
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