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क्या युवाओं में कम हो रहा पीएम मोदी का क्रेज? ये हैं सबूत

2014 के लोकसभा चुनाव में तो युवा वर्ग खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुरीद रहा।

क्या युवाओं में कम हो रहा पीएम मोदी का क्रेज? ये हैं सबूत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ग के लोगों में पैठ बनाए हुए हैं। युवाओं में तो पीएम मोदी खास तौर पर छाए रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में तो युवा वर्ग खास तौर पर उनका मुरीद रहा। लेकिन, अब युवाओं में उनका रुतबा कम होता नजर आ रहा है।
अगर जवाहर लाल यूनिवर्सिटी, राजस्थान यूनिवर्सिटी और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों के संदर्भ में देखा जाए तो ऐसा ही महसूस होने लगा है। इन तीनों ही अहम चुनावों में भाजपा की छात्र यूनिट अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दमखम दिखाने में नाकाम रही है।

छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी को मात

जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव में लग रहा था कि एबीवीपी लेफ्ट समर्थित छात्र संगठन आइसा, एसएफआइ और डीएसएफ को मात देगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसी तरह डूसू में भी एबीवीपी को दो अहम पदों से हाथ धोना पड़ा। इसी तरह राजस्थान में आम आदमी पार्टी समर्थित नए संगठन भी अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रहा।
छात्र संघ चुनावों में भाजपा की हार से जहां विपक्ष को हौसले बुलंद हुए हैं, वहीं यह भी सवाल उठने लगा है कि क्या युवाओं का पीएम मोदी और उनकी नीतियों से भरोसा उठ रहा है। सियासी पंडितों की मानें तो कई मयानों में यह सही भी हैं।

युवाओं में नहीं पहुंचे सकारात्मक काम

युवाओं ने जिस तरीके से मोदी पर भरोसा करके भाजपा को वोट दिया था, उसे निराशा जरूर हुई है। यह भी कह सकते हैं कि भाजपा इस दौरान अपने सकारात्मक कामों को युवाओं को बीच पहुंचाने में नाकाम रही। वहीं, विपक्ष भाजपा के खिलाफ रणनीति बनाने में कामयाब रहा।
छात्र राजनीति के पंडितों की मानें तो एबीवीपी की हार में नोटबंदी और फैली बेरोजगारी ने अहम रोल अदा किया है। इसके अलावा कालेधन पर भी सरकार कुछ खास हासिल नहीं कर पाई। इसका भी खामियाजा छात्र चुनावों में एबीवीपी को उठाना पड़ा।

मोदी सरकार से थी बड़ी उम्मीदें

साफ है कि आज युवा बेहतर भविष्य के लिए मोदी सरकार से आस लगाए हुए है। तीन साल में जिस तरह से बेरोजगारी की मार युवा झेल रहा है, उससे भाजपा सरकार की छवि पर नकारात्मक असर जरूर पड़ता दिख रहा है।
कौशल विकास मंत्रालय भी रोजगार बढ़ोतरी करने में नाकाम रहा है। युवा वर्ग मोदी सरकार से शुरू से ही बड़ी उम्मीदें लगाए हुए था। लेकिन, भाजपा फिलहाल उसकी आस पर खरी नहीं उतर पाई है। यह वाकई भाजपा के लिए चिंता का सबब है।
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