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बकरीद मनाने का सबसे नायाब तरीका, बकरा कटा पर एक कतरा खून नहीं बहा

बकरीद किसको कि ईद-उल-अज़हा के नाम से भी जाना जाता है।

बकरीद मनाने का सबसे नायाब तरीका, बकरा कटा पर एक कतरा खून नहीं बहा

बकरीद पर पशुओं की कुर्बानी देने के खिलाफ आरएसएस की विंग मुस्‍लिम राष्‍ट्रीय मंच ने देश में एक नई मिसाल पेश की है। राजधानी लखनऊ में तर्क-वितर्क के बीच आखिरकार मुस्‍लिम राष्‍ट्रीय मंच के सदस्‍यों ने शनिवार को ईद उल अजहा की नमाज के बाद 'बकरा केक' की कुर्बानी दी।

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देश भर में हिन्‍दूवादी संगठनों समेत कई संगठन हर साल बकरीद पर देश भर में पशु प्रेमी निर्दोष बकरों की कुर्बानी दिए जाने के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी बेजुबान पशुओं की कुर्बानी के खिलाफ मुस्‍लिम समुदाय की ओर से भी आवाजें उठीं हैं।

इसमें मुस्‍लिम राष्‍ट्रीय मंच से जुड़े लोग काफी पहले से ही बेजुबानों की कुर्बानी को गलत ठहराते रहे हैं। इस बीच आज बकरीद के दिन केक वाले बकरे की कुर्बानी देकर राष्ट्रीय मुस्‍लिम मंच ने नई बहस को जन्‍म दे दिया है।

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इससे पहले मुस्‍लिम राष्‍ट्रीय मंच ने कहा था कि पशु, पक्षी अल्लाह की रहमत हैं उन पर तुम रहम करो तभी अल्लाह की रहमत तुम पर बरसेगी। नबी के फरमान को देखते हुए जानवरों की कुर्बानी नही होनी चाहिए क्योंकि उसमें जान होती है।

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