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इतिहास में पहली बार: RSS ने कराई इफ्तार पार्टी, गाय के दूध से रोजा खोला

पार्टी में मौजूद सभी लोगों खजूर और गाय के दूध से रोजा खोला।

इतिहास में पहली बार: RSS ने कराई इफ्तार पार्टी, गाय के दूध से रोजा खोला

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अयोध्या में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब आरएसएस ने अयोध्या में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। पार्टी में मौजूद सभी लोगों खजूर और गाय के दूध से रोजा खोला।

इफ्तार में आरएसएस नेता और राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक इंद्रेश कुमार भी मौजूद थे। इफ्तार के बाद इंद्रेश कुमार ने मुसलमानों की एक छोटी सभा को संबोधित किया। इंद्रेश कुमार ने गाय, राम मंदिर, तीन तलाक और तुलसी के बारे में मुसलमानों को जानकारी दी।

इफ्तार पार्टी के दौरान 'भारत माता की जय' के साथ 'मादर-ए-वतन जिंदाबाद' के नारे लगे। साथ ही पाकिस्तान नहीं, हिंदुस्तान-हिंदुस्तान के भी नारे लगाए गए। पार्टी में गाय के दूध और खजूर से रोजा खोला गया।

इंद्रेश कुमार ने अपने हाथों से रोजेदारों को खजूर खिलाए। इस इफ्तार पार्टी में तकरीबन 100 मुसलमानों ने शिरकत की। हालांकि, ज्यादातर रोजेदारों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि ये पार्टी आरएसएस की तरफ आयोजित की गई है, वहीं उनमें से काफी लोगों ने राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का नाम भी नहीं सुना था।

इन्द्रेश कुमार ने कहा कि गाय को लेकर इस वक्त पूरे देश में एक माहौल है, वहीं तीन तलाक पर भी चर्चा गर्म है। साथ ही राम मंदिर का मसला भी इस समय चर्चा के केंद्र में है। ऐसे में इंद्रेश कुमार ने साफ कहा कि गाय सिर्फ हिंदुओं के लिए ही मां समान नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए मां है।

इफ्तार पार्टी सियासी नहीं

इंद्रेश कुमार ने कहा कि इस इफ्तार के आयोजन को सियासत के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। ये किसी एजेंडे का हिस्सा नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

संघ प्रमुख ने पूछा हालचाल

इफ्तार पार्टी में शहर के प्रमुख मुस्ल‍िम लोगों को आमंत्रित किया गया था। इंद्रेश कुमार ने रोजा इफ्तार के लिए बैठे लोगों से उनका हालचाल पूछा। साथ ही उनके साथ बैठकर इफ्तार भी किया।

2002 में बना मुस्ल‍िम राष्ट्रीय मंच

आरएसएस ने 2002 में मुस्ल‍िम राष्ट्रीय मंच की स्थापना की थी। तब संघ प्रमुख रहे केएस सुदर्शन का मकसद आरएसएस की पहुंच को मुस्ल‍िम कम्युनिटी तक पहुंचाना था। इसमें राम मंदिर का मुद्दा भी शामिल था।

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