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तीन तलाक को लेकर SC में पक्ष रखेगा MRM

इस केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 11 मई को सुनवाई होनी है। लेकिन इससे पहले 4 से 6 मई को एमआरएम की बैठक होगी।

तीन तलाक को लेकर SC में पक्ष रखेगा MRM

मुस्लिम समाज में प्रचलित तीन तलाक की प्राचीन परंपरा को खत्म करने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का आनुषांगिक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) सर्वोच्च न्यायालय में मई महीने में होने वाली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकता है।

इसमें वो इस मामले को लेकर अपने पक्ष यानि एक साथ तीन तलाक की प्रथा की समाप्ति की वकालत करेगा। क्योंकि कुरान व हदीस में भी इसे गलत बताया गया है। एमआरएम के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को लेकर 11 मई को सुनवाई होनी है।

इससे पहले 4 से 6 मई तक हरिद्वार में एमआरएम की अखिल भारतीय राष्ट्रीय कार्यकारिणाी की बैठक होगी। इसमें तीन तलाक के विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तीन तलाक को समाप्त करने को लेकर मंच द्वारा सुको में पक्षकार की भूमिका निभाने के विषय पर भी विचार किया जाएगा।

कार्यकारिणी के उठने वाले अन्य विषय

एमआरएम की कार्यकारिणी में मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी व नगर संयोजक शामिल होंगे। इसमें देश के अलग-अलग भागों में तीन तलाक व अन्य मामलों को लेकर चलाए जा रहे जागरुकता अभियानों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य की योजनाओं का खाका तैयार किया जाएगा।

अभी तीन तलाक से पीड़ित मुस्लिम बहनों के जो आंकड़ें आए हैं, उनपर भी विचार किया जाएगा। साथ ही यह बात भी स्पष्ट रुप से मंच के अखिल भारतीय फोरम के समक्ष रखी जाएगी कि तीन तलाक देना गैर मानवीय है और वर्तमान में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

बैठक में हलाला के बारे में भी जागरुकता बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा होगी। कार्यकारिणाी में हर वो विषय शामिल किया जाएगा। जिससे मुस्लिम बहनों के अधिकारों की रक्षा हो सकेगी। इस बैठक से पहले 13 अप्रैल को राजधानी दिल्ली में भी तीन तलाक को लेकर एमआरएम द्वारा एक सम्मेलन किए जाने की संभावना है।

अभी निगम चुनाव को लेकर निषेधाज्ञा लगी हुई है। लेकिन अगर आयोग की अनुमति मिल जाती है तो कार्यक्रम किया जाएगा। न्यायालयों में तीन तलाक को लेकर चल रहे मामलों पर नजर डाले तो सबसे ज्यादा केस तीन तलाक को लेकर मुस्लिम महिलाआें से ही जुड़े हुए हैं। लंबित मामलों में भी तीन तलाक के मामले सबसे ज्यादा हैं।

राज्यों में जारी जागरुकता अभियान

तीन तलाक को खत्म करने के लिए एमआरएम के कार्यकत्ता व पदाधिकारी काफी समय से समाज में जागरुकता अभियान चला रहे हैं। इसमें उत्तर-प्रदेश के फैजाबाद और लखनऊ से लेकर पंजाब के जालंधर, राजस्थान के जयपुर, हरियाणा के मेवात और उत्तराखंड के हलद्वानी, रामनगर में जागरुकता कार्यक्रम किए गए हैं।

मई के अंत तक इस बारे में समूचे देशभर से आंकड़ा आ जाएगा। अगर जरुरत पड़ी तो इस अभियान को और आगे बढ़ाया जाएगा। बीते 26 मार्च को जयपुर में एमआरएम की ओर से गरीब व पिछड़े तबके की 100 मुस्लिम महिलाआें का सामूहिक विवाह कराया गया है। इसमें महिलाओं का जनधन योजना में बैंक खाता खुलवाया गया।

इसके अलावा शादी के दौरान दिया जाने वाला मेहर का पैसा उज्जवला योजना के तहत बैंक अकाउंट में भी डलवाया गया है। इसका मकसद यह है कि मुस्लिम महिलाओं को न केवल मेहर का वादा मिले। बल्कि पैसा भी मिले। कार्यक्रम में आए मुस्लिम युवाआें को एमआरएम ने तीन तलाक के बारे में जागरुक किया और यह संकल्प भी दिलाया कि वो अपने जीवन में इससे दूर रहें।

गौरतलब है कि उत्तर-प्रदेश के सहारनपुर की एक गर्भवती मुस्लिम महिला ने तीन तलाक का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे जल्द से जल्द खत्म करने की अपील की है। महिला को उसके पति ने केवल इसलिए तीन तलाक कहकर घर से निकाल दिया था कि उसने दो बेटियों का जन्म दिया था और फिर तीसरी बेटी होने का अंदेशा था।

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