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ट्रिपल तलाक में नया पेंच, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार मुसलमानों के पर्सनल लॉ को खत्म करना चाहती है।

ट्रिपल तलाक में नया पेंच, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध जारी रखेगा। रविवार को यहां हुई बोर्ड की एक दिनी बैठक में यह फैसला किया गया। बोर्ड के सदस्यों ने एक सुर से कहा कि इस्लाम में तीन तलाक की व्यवस्था है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बोर्ड ने फैसले के अध्ययन के लिए 10 सदस्यीय कमेटी बना दी है। जो 10 दिन में रिपोर्ट देगी। बोर्ड ने सभी के लिए एक कानून यानी समान नागरिक कानून संहिता 'कॉमन सिविल कोड' लागू करने की मंशा की भी आलोचना की हैं।

इस फैसले में कहा गया हैं कि भारत में कई धर्म और मजहबों को मानने वाले रहते हैं, सबकी अपनी मान्यताएं और परंपराएं हैं, इसलिए एक कानून लागू करना उचित नहीं होगा।

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यहां बड़े तालाब के किनारे बसे खानूगांव में एक निजी कॉलेज में हुई बैठक रविवार देर रात तक चली। बैठक में तय किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अध्ययन के बाद समिति की सिफारिश आने पर बोर्ड तय करेेगा कि मुसलमान तीन तलाक पर अदालत के फैसले को मानें या नहीं।

कोर्ट के फैसले का समर्थन भी किया

सूत्रों के मुताबिक दिनभर चली बैठक में कुछ सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत भी किया। कुछ सदस्यों ने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ छेड़छाड़ बताया।सदस्य यासिर उस्मानी ने बताया कि देश में सभी मजहबों के लोग रहते हैं। सबका अपना-अपना धार्मिक कानून है।

सुप्रीम कोर्ट का इस तरह पर्सनल लॉ में दखल दूसरे सम्प्रदायों के लिए भी ठीक नहीं होगा। बैठक में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सदस्य और सांसद अकबरुद्दीन औवेसी भी मौजूद थे।

शरीयत में दखल-अंदाजी नहीं होगी

बोर्ड के सदस्यों ने बैठक में आरोप लगाया कि सरकार मुसलमानों के पर्सनल लॉ को खत्म करना चाहती है। जिसकी वजह से मुस्लिम अपने मजहबी कानून पर अमल नहीं कर पाएंगे। पर्सनल में दखलंदाजी पर सरकार को पुर्नविचार करना चाहिए।

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