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ट्रिपल तलाक पीड़िता बोली, मोदी जी जल्द लागू हो यूनिफॉर्म कोड

18 वर्षीय विवाहित युवती ने साफ तौर पर ट्रिपल तलाक की व्यवस्था को मानने से इनकार किया है

ट्रिपल तलाक पीड़िता बोली, मोदी जी जल्द लागू हो यूनिफॉर्म कोड
नई दिल्ली. इस समय देश में ट्रिपल तलाक मुद्दे को लेकर बहस जारी है। और इसी बीच एक मुस्लिम महिला ने अपने पति के लिये मोर्चा खोल लिया है। 18 वर्ष की मुस्लिम लड़की को उसके पति ने तलाक देने का नोटिस भेजा था, लेकिन महिला ने नोटिस को स्वीकार न करते हुये कानून की मदद लेने का फैसला लिया है। मुस्लिम लड़की ने पीएम मोदी से गुहार लगाई है कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। उसने आगे कहा कि इस प्रथा ने मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी को बर्बाद कर दिया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अर्शिया बागवान ने कहा कि मैं तीन तलाक की व्यवस्था को नहीं मानूंगी साथ ही मैं तलाक के लिए दिए गए कारण को भी नहीं मानूंगा। आगे अर्शिया ने कहा कि बिना मेरा पक्ष सुने मैं तुम्हें और नहीं चाहता यह कैसे तलाक का कारण हो सकता है। जब दुनिया के 22 देश ये इस्लामिक कानून नहीं मानते तो भारत इसे क्यों मान रहा है? अर्शिया अब अपनी पढा़ई पूरी कर उन मुस्लिम समुदाय की उन महिलाओं के लिए काम करना चाहती हैं जो ऐसे कानूनों के कारण पीड़ित हैं।
अखबार के अनुसार अर्शिया ने बताया कि 'मेरी शादी 16 साल की उम्र में ही कर दी गई थी। मेरे परिजनों ने दहेज दिया था। मेरे पति के घर वाले आर्थिक तौर पर मजबूत हैं और उनकी बारामती के मार्केट एरिया में दुकान है।' असली संतान को पाकर रो पड़ीं माएं, हॉस्पिटल में हुई थी नवजातों की अदला-बदली उन्होंने बताया कि 'शादी के तुरंत बाद सास ने शोषण करना शुरू कर दिया। मुझसे एक कुत्ते की तरह काम करने के लिए कहा जाता था।
बता दें कि अर्शिया ने यह आरोप भी लगाया कि उसकी मां और ससुर के बीच प्रेम संबंध थे। जब मैं गर्भवती थी तो मेरे साथ बुरा व्यवहार किया गया। अर्शिया ने आगे बताया कि जब मैं अपने परिजनों के घर थी, तभी मुझे तलाक की नोटिस मिला और मुझे मेरे पति ने तुरंत घर बुलाया था। आपको बता दें कि ट्रिपल तलाक को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में है. हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अब भी ट्रिपल तलाक के सपोर्ट में है लेकिन सरकार ने अपने जवाब में साफ कह दिया है कि संविधान में इसकी कोई जगह नहीं है।
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