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तीन तलाक पर मुस्लिम बोर्ड के तेवर हुए नरम, SC में दायर किया हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ इस मामले में सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

तीन तलाक पर मुस्लिम बोर्ड के तेवर हुए नरम, SC में दायर किया हलफनामा

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आज तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से कहा, 'हम काजियों को परामर्श जारी कर कहेंगे कि वह निकाह के वक्त दुल्हों को तीन तलाक का रास्ता नहीं अपनाने की सलाह दें।'

मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में कहा, 'तीन तलाक शरियत के तहत एक अवांछिनीय परंपरा है और निकाहनामे में इसकी अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए।'

वहीं रविवार को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री वैंकया नायडू ने कहा कि मुस्लिम समुदाय अगर तीन तलाक की प्रथा को ‘बदलने' में विफल रहता है तो सरकार कदम उठा सकती है और इसको प्रतिबंधित करने के लिए कानून बना सकती है।

नायडू ने यहां एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, मुद्दे को देखना समाज पर निर्भर करता है और अच्छा होगा अगर मुस्लिम समाज खुद ही इस प्रथा को बदल दे। अन्यथा ऐसी स्थिति उभरेगी कि सरकार को तीन तलाक को प्रतिबंधित करने वाला कानून लाना होगा।

प्रसारण मंत्री ने कहा, ‘यह किसी के निजी मामले में हस्तक्षेप करना नहीं है बल्कि महिलाओं के लिए न्याय का सवाल है। सभी महिलाओं को समान अधिकार होना चाहिए। कानून के समक्ष समानता यह मुद्दा है।'

केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'हिंदू समाज ने बाल विवाह पर चर्चा की और इसे प्रतिबंधित करने के लिए संसद में कानून पारित किया गया। दूसरा है सती प्रथा जिसमें प्राचीन समय में पति की मौत के बाद पत्नी मौत को गले लगा लेती थी।'

इसे हिंदू समाज ने कानून बनाकर बंद कर दिया था। तीसरा मामला दहेज का था दहेज जिसके लिए दहेज उन्मूलन कानून पारित किया गया और हिंदू समाज ने इसे स्वीकार भी किया।

उन्होंने कहा, जब लगा कि इस तरह की प्रथा समाज की भलाई के खिलाफ है तो हिंदू समाज ने उन पर चर्चा की और उनमें सुधार किए।

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