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26/11 हमला बरसी: पाकिस्तान में ये बेचता था आतंकी कसाब, ये है उसकी सच्ची कहानी

कसाब ने दही बड़ा बेच कर परिवार पालने वाले पिता से झगड़ा करने के परिवार और गांव दोनों छोड़ दिया।

26/11 हमला बरसी: पाकिस्तान में ये बेचता था आतंकी कसाब, ये है उसकी सच्ची कहानी

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26/11 हमले को आज पूरे 9 साल हो गए हैं। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पाकिस्तान से समुद्री रास्ते से भारत में घुसे 10 लश्कर आतंवादियों ने मुंबई पहुंचे।

हमले के दौरान लशकर ए तैयाबा का पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब जिंदा गिरफ्तार किया गया था। मुंबई आतंकी हमले में पुलिस के हाथ जिंदा लगे कसाब ने आतंकी हमले के बारे में पुलिस को सारी बातें लिखकर दी हैं।

पाक से था कसाब का नाता

मुंबई हमले से ठीक 3 साल पहले साल 2005 में पाकिस्तान के फरीदकोट में जन्मे कसाब ने दही बड़ा बेच कर परिवार पालने वाले पिता से झगड़ा करने के परिवार और गांव दोनों छोड़ दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक कसाब के नए कपड़े खरीदने की जिद की वजह से पिता से उसका झगड़ा हुआ था जिसके बाद उसने घर छोड़ दिया। उससे पहले कसाब पिता के साथ पाक में दही बड़ा बेचा करता था।

ऐसे हुई लश्कर में एंट्री

लेकिन घर छोड़ने के बाद कसाब बड़े भाई के पास मजदूरी करने चला गया। मजदूरी में मन नहीं लगने की वजह से कसाब चोरी और छोटे-मोटे अपराध करने लगा। इस दौरान कसाब की मुलाकात ऐसे युवकों से हुई जो लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे।

मिली थी खास ट्रेनिंग

लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने के बाद कसाब को एक खास मिशन दिया गया। 3 महीने की ट्रेनिंग में हथियार चलाना, बम फेंकना, रॉकेट लांचर और मोर्टार चलाने की ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 24 में से 10 लड़के चुने गए। इन्हीं में एक नाम अजमल आमिर कसाब का भी था।

मुंबई हमले के लिए भेजा था भारत

उसके बाद इन सभी को भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए समुंद्र के रास्ते भेजा गया। जहां उन्हें मुंबई में अपने इस खास मिशन को अंजाम देना था। हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी।

जबकि 300 से भी ज्यादा लोग घायल हो गए थे। सीएसटी स्टेशन, ताज होटल, नरीमन हाउस, लियोपोल्ड कैफे आदि पर हुए हमले में आतंकियों से तीन दिनों तक पुलिस, एनएसजी के जवानों ने लोहा लिया था।

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