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सरकार की कोशिशों के बावजूद बढ़ रहा है जिस्मफरोशी का धंधा, सुरक्षा एजेंसियां भी कर चुकी है आगाह

पुराने वक्त के कोठों से निकल कर देह व्यापार का धंधा अब वेबसाइटों तक पहुंच गया है।

सरकार की कोशिशों के बावजूद बढ़ रहा है जिस्मफरोशी का धंधा, सुरक्षा एजेंसियां भी कर चुकी है आगाह

नई दिल्ली. सरकार और सुरक्षा एजेंसी की तमाम कोशिशों के बावजूद वेश्यावृत्ति के धंधे का पूरी दुनिया में उभार चरम पर है। खुफिया एंजेसी भी कई बार अलर्ट कर चुकी हैं कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश वेश्यावृत्ति के जरिए देश की आतंरिक सुरक्षा को भेदने की कोशिश कर रहें हैं। रेड लाइट इलाकों से निकल कर वेश्यावृत्ति अब मसाज पार्लरों एवं एस्कार्ट सर्विस के रूप में भी फल-फूल रही है। देह का धंधा कमाई का चोखा जरिया बन चुका है। गरीब और विकासशील देशों जैसे भारत, थाइलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि में सेक्स पर्यटन का चलन शुरू हो चुका है।

पुराना है जिस्मफरोशी का धंधा

जिस्मफरोशी दुनिया के पुराने धंधों में से एक है। बेबीलोन के मंदिरों से लेकर भारत के मंदिरों में देवदासी प्रथा वेश्यावृत्ति का आदिम रूप है। गुलाम व्यवस्था में गुलामों के मालिक वेश्याएं रखते थे। उन्होंने वेश्यालय भी खोले। तब वेश्याएं संपदा और शक्ति की प्रतीक मानी जाती थीं। मुगलों के हरम में सैकड़ों औरतें रहती थीं। जब अंग्रेजों ने भारत पर अधिकार किया तो इस धंधे का स्वरूप बदलने लगा। राजाओं ने अंग्रेजों को खुश करने के लिए तवायफों को तोहफे के रूप में पेश करना शुरू किया।

इंटरनेट के जरिए बढ़ रहा है वेश्यावृत्ति का व्यापार

पुराने वक्त के कोठों से निकल कर देह व्यापार का धंधा अब वेबसाइटों तक पहुंच गया है। इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी के मामले में पिछड़ी पुलिस के लिए इस नेटवर्क को भेदना खासा कठिन है। सिर्फ नेट पर अपनी जरूरत लिखकर सर्च करने से ऐसी दर्जनों साइट्स के लिंक मिल जाएंगे जहां हाईप्रोफाइल वेश्याओं के फोटो, फोन नंबर और रेट तक लिखे होते हैं। इन पर कालेज छात्राएं, मॉडल्स और टीवी-फिल्मों की नायिकाएं तक उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, देश के टॉप-5 रेड़ लाइट एरिया-
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