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BMC चुनाव: किसी को नहीं मिला बहुमत, बीजेपी को मिली बड़ी कामयाबी

बीएमसी की 227 सीटों के लिए मंगलवार (21 फरवरी) को वोटिंग हुई थी।

BMC चुनाव: किसी को नहीं मिला बहुमत, बीजेपी को मिली बड़ी कामयाबी
मुंबई. मुंबई महानगर पालिका के चुनाव में करीब सभी सीटों के परिणाम आ चुके हैं। पांच बजे तक हुई मतगणना में आए परिणामों के मुताबिक किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। अभी तक शिवसेना को 84 और भाजपा को 82 सीटों में जीत हासिल हो चुकी है। ताजा परिणामों के अनुसार, कुल 227 में शिवसेना को 84, भाजपा को 81, कांग्रेस को 31, एनसीपी को 9, एमएनएस को 7 और अन्य को 14 सीटें मिली हैं।
नासिक में बीजेपी 24, शिवसेना 5, कांग्रेस 2 और मनसे 1 और एनसीपी 2 सीट पर आगे है। अमरावती में बीजेपी दो सीटों पर जबकि कांग्रेस एक सीट पर आगे है। यहां अभी शिवसेना का खाता भी नहीं खुला है। पिंपरी चिंचवाड़ में शिवसेना 4, बीजेपी 8 और एनसीपी 4 सीटों पर आगे है.उल्हासनगर में शिवसेना 3 सीटों और बीजेपी एक सीट पर आगे है।
वहीं नागपुर में बीजेपी को 82, शिवसेना को शून्य, कांग्रेस को 23, एनसीपी को 1 और अन्य को 4 सीटें मिली हैं। बता दें कि बीएमसी चुनाव में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत है। इस बीच खबर है कि अमरावती में भाजपा की रीता पडोले और पिंपरी में भाजपा के रवि लांगे निर्विरोध चुनाव जीत गए हैं। महाराष्ट्र के 10 नगर निगमों के लिए मंगलवार को हुए चुनाव में करीब 56 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला, जबकि बीएमसी में 55 प्रतिशत मतदान हुआ।
बीएमसी चुनाव पर सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करके कहा है कि शिव सेना और भाजपा को एक हो जाना चाहिए क्योंकि दोनों में हिंदूत्व के खून का रिश्ता है। सुब्रमण्यम स्वामी ने दोनों को साथ लाने के लिए काम करने की भी बात भी कही। कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के कारण संजय निरुपम ने इस्तीफे की पेशकश की है। बीएमसी में कांग्रेस की हार पर बोलते हुए संजय निरुपम ने कहा कि, ”मैं हार की जिम्मेदारी लेता हूं” साथ ही संजय निरूपम ने पार्टी के अंदर गुटबाजी का भी आरोप लगाया है। इससे पहले नारायण राणे ने कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए संजय निरुपम को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं शिव सेना के संजय राउत ने साफ किया किया कि बीजेपी से गठबंधन गठबंधन नहीं करेंगे।
बीएमसी की 227 सीटों के लिए मंगलवार (21 फरवरी) को वोटिंग हुई थी। यह बीएमसी चुनाव इसलिए ख़ास रहा क्योंकि शिवसेना और बीजेपी ने अपनी 25 साल पुरानी दोस्ती को तोड़कर ये चुनाव अलग-अलग लड़ा। इसलिए ये चुनाव सीएम देवेन्द्र फड़नवीस और शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे दोनों के लिए अहम माना जा रहा था।
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