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चुनाव आयोग से मिले मुलायम, बोले- बेटे से कोई विवाद नहीं

रामगोपाल को राज्यसभा के नेता पद से हटाने के लिए लिखा पत्र

चुनाव आयोग से मिले मुलायम, बोले- बेटे से कोई विवाद नहीं
नई दिल्ली. समाजावदी पार्टी के चुनाव चिन्ह 'साइकल' पर दावे के लिए मुलायम सिंह यादव ने सोमवार दोपहर चुनाव आयोग में मुलाकात की। आयोग से मुलाकात के बाद मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सिंबल का मामला चुनाव आयोग में है। इसका फैसला आयोग से ही होगा। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में थोड़ा बहुत ही मतभेद है। मेरे बेटे को कुछ लोगों ने बहका लिया है। उन्होंने कहा, 'मेरा बेटे से कोई विवाद नहीं है। रामगोपाल की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि बेटे से कोई विवाद नहीं है और हम मामला सुलझा लेंगे।' इस बीच मुलायम सिंह ने राज्य सभा के सभापति हामिद अंसारी को पत्र लिखकर रामगोपाल यादव से राज्यसभा में एसपी के नेता का दर्जा वापस लिए जाने की मांग की है। इसके अलावा उनकी सीट में भी एक निर्दलीय के तौर पर बदलाव करने को कहा गया है।
चुनाव आयोग पहुंचे मुलायम सिंह यादव के साथ अमर सिंह और शिवपाल यादव भी थे। इस बीच अखिलेश कैंप से रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल भी चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंच चुके हैं। 25 साल पहले एसपी की स्थापना करने वाले मुलायम सिंह यादव के बेटे और यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने आयोग से साइकल चुनाव चिह्न दिए जाने की मांग की है। अखिलेश ने पार्टी के 229 विधायकों में से 200 से अधिक विधायकों, 15 सांसदों और 5,000 से अधिक कार्यसमिति सदस्यों के समर्थन वाला पत्र आयोग को सौंपा है।
एनबीटी की रिपोर्मुट के मुताबिक, लायम सिंह यादव चुनाव आयोग में यह दलील दी कि रामगोपाल यादव ने 1 जनवरी को जो अधिवेशन बुलाया था, वह अवैध था। मुलायम गुट के मुताबिक रामगोपाल उस दौरान पार्टी से बर्खास्त थे, इसलिए उन्हें अधिवेशन बुलाने का अधिकार ही नहीं था। इसके अलावा मुलायम सिंह यादव की ओर से यह पार्टी संविधान का हवाला दिया गया कि अध्यक्ष की अनुमति के बिना अधिवेशन नहीं बुलाया जा सकता।
रविवार को मुलायम सिंह यादव ने विवाद जारी रहने का संकेत देते हुए कहा था, 'मैं अब भी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं, शिवपाल प्रदेश अध्यक्ष हैं और अखिलेश सिर्फ यूपी के सीएम हैं।' शनिवार को अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग में 6 बक्सों में भरकर दस्तावेज पेश कर उनके पक्ष में समर्थन का दावा किया था। पिछले दिनों रामगोपाल यादव ने लखनऊ में एक आपातकालीन अधिवेशन बुलवाकर अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करवा दिया।
इसके अलावा शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और अमर सिंह को पार्टी से ही बाहर कराने का प्रस्ताव पारित करा दिया गया था। मुलायम सिंह ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि मुझे पता नहीं है कि पार्टी बंट चुकी है, मैं अब भी राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं। मुलायम सिंह ने रामगोपाल की ओर से बुलाए गए अधिवेशन को ही अवैध ठहराते हुए कहा था कि वह पार्टी से बर्खास्त थे, इसलिए उन्हें किसी सम्मेलन को बुलाने का ही अधिकार नहीं था।
रामगोपाल बोले, अखिलेश की है 'साइकल'
पार्टी के चुनाव चिह्न साइकल पर अखिलेश यादव का हक होने की बात करते हुए रामगोपाल ने कहा कि जिसके पास बहुमत होगा साइकल उसी की होगी। बहुमत अखिलेश यादव के साथ है, इसलिए इलेक्शन सिंबल उन्हें ही मिलना चाहिए।
अमर सिंह ने अखिलेश के हलफनामों को बताया फर्जी
समाजवादी परिवार में मचे घमासान के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे अमर सिंह ने तो रविवार को उन दस्तावेजों को ही फर्जी करार दे दिया, जिसे अखिलेश के समर्थन में आयोग को सौंपा गया है। अमर सिंह ने सुलह का फॉर्म्युला देते हुए कहा, 'मैं इस्तीफे के लिए तैयार हूं और शिवपाल यादव चुनाव नहीं लड़ेंगे। इससे ज्यादा वह क्या चाहते हैं?'
कांग्रेस से अखिलेश के गठबंधन पर संशय
इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी से हमारे गठबंधन को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि हम सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं।
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