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मुलायम ने बदले अखिलेश के सारे फैसले, शिवपाल की वापसी

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपने वीटो का इस्तेमाल किया और सीएम अखिलेश के सारे फैसले पलट दिए।

मुलायम ने बदले अखिलेश के सारे फैसले, शिवपाल की वापसी
नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के आगे सीएम अखिलेश की एक न चली। मुलायम सिंह यादव ने आखिरकार अपने वीटो का इस्तेमाल किया और अखिलेश के सारे फैसले पलट दिए गए। शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री कार्यालय से आधिकारिक जानकारी आ गई कि गायत्री प्रजापति को कैबिनेट में वापस लिया जाएगा। साथ ही, शिवपाल यादव के भी सारे पोर्टफोलियो वापस किए जाएंगे।
गौरतलब है कि एसपी सुप्रीमो मुलायम ने शिवपाल को यूपी प्रदेश अध्यक्ष बनाने की घोषणा की थी। इसके तुरंत बाद सीएम अखिलेश ने शिवपाल से पीडब्ल्यूडी समेत सारे अहम मंत्रालय वापस ले लिए। इसके बाद शिवपाल यादव ने इस्तीफे की पेशकश कर दी। यहीं से समाजवादी कुनबे के भीतर चल रही 'महाभारत' की खबर आम हो गई।
इसी तरह सीएम अखिलेश यादव ने गायत्री प्रजापति को खनन विभाग के मंत्री पद से निलंबित कर दिया था। गायत्री प्रजापति पर अवैध खनन में शामिल होने का आरोप है। गायत्री प्रजापति को शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है। यूपी की राजनीति में आए इस भूचाल के बाद अंतिम महफिल मुलायम सिंह के सामने जमी।
एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में एक के बाद एक मुलाकातों का दौर संपन्न हुआ। मुलायम से मिलने के बाद शिवपाल ने संकेत भी दिए कि आखिरी फैसला नेताजी का होगा। शुक्रवार को नेताजी कार्यकर्ताओं के संबोधन के लिए लखनऊ पहुंचे। वहां उन्होंने घोषणा कर दी कि घर में ही नहीं बल्कि पार्टी में भी एक राय है।
मुलायम ने शिवपाल और गायत्री के लिए गए सारे पद वापस लेने को कहे। शुक्रवार देर शाम इसकी आधिकारिक जानकारी भी आ गई। यूपी सीएमओ ऑफिस के ऑफिशल ट्विटर हैंडल से दोनों ही फैसले लिए जाने की पुष्टि कर दी गई।
हालांकि फैसला वापसी के बाद समाजवादी पार्टी में उठा तूफान थम जाएगा, इसके संकेत साफ नहीं हैं। इससे पहले इंडिया टीवी के एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने स्पष्ट तौर पर अपनी नाखुशी जाहिर कर दी है। यूपी के प्रदेश अध्यक्ष पर चाचा शिवपाल के बैठने का दर्द उनके अंदर साफ झलक रहा है।
अखिलेश ने उस कार्यक्रम में कहा, 'मुझे भी उम्मीदवारों को टिकट बांटने का अधिकार मिलना चाहिए। अगर पार्टी की परीक्षा है तो मेरी भी परीक्षा है। मैंने यही कहा कि जब टिकट दिए जाएं तो मेरा भी कहना माना जाए और टिकट हमारे रास्ते से भी निकलें।' अखिलेश यादव ने कार्यक्रम के दौरान यह तो कहा कि अंतिम फैसला नेताजी का होगा, लेकिन इसे भी जोड़ने से पीछे नहीं हटे कि वह ऐसे फैसले लेते रहेंगे।
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