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जानिए- जेल से कैसे चलता है बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का सिक्का

बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर 18 केस दर्ज हैं।

जानिए- जेल से कैसे चलता है बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का सिक्का
लखनऊ. उत्तप्रदेश की सियासी गलियारों में बाहुबलियों का हमेशा से बोलबाला रहा है। इन्हीं में एक हैं यूपी के सबसे बड़े बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी जो पिछले 12 सालों से लखनऊ के जेल में कैद हैं।
आपको बता दें कि मुख्तार जेल में रहकर ही अपनी हुकूमत का सिक्का पूर्वांचल के करीब 7 जिलों में चला रहे हैं। वे इस बार बसपा के टिकट पर अपनी भाग्य अजमा रहे हैं। मफिया अंसारी ने 1996 में यूपी की सियासत में कदम रखा था।
उनके जेल में होने के कारण उनके दोनों बेटे प्रचार अभियान की कमान संभाल रखे हैं। छोटे बेटे उमर रोज अपने पिता के खातिर घंटों की कड़ी मशक्कत कर वोट मांग रहे हैं। अंसारी के चुनावी क्षेत्र में 4 लाख मतदाता हैं जिनमें दलित और मुसलमानों की अच्छी पकड़ है। यह भी बता दें कि अंसारी पर 18 केस दर्ज है।

बता दें कि अपराध की दुनिया से यूपी की राजनीति में आकर अपनी एक खास मुकाम हासिल करने वाले मुख्तार अंसारी पिछले चार बार से मऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक बन रहे हैं। वे इस बार समाजवादी पार्टी से टिकट नहीं मिलने की कयास पर पार्टी से इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हो गए।

इससे पहले 2007 में मुख्तार अंसारी और भाई अफजल अंसारी के साथ बसपा में शामिल हो गए थे। लेकिन 2010 में राम सिंह मौर्य की हत्या का आरोप लगने के बाद मायावती ने पार्टी से बाहर कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने कौमी एकता दल के नाम से एक अलग पार्टी बनाई। और 2012 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में इसी पार्टी के नाम पर अपने प्रत्याशी उतारे।

मालूम हो कि इस चुनाव में वे खुद तो जीत गए लेकिन आपराधिक रिकार्ड होने की वजह से उनका रिश्ता जेल से नहीं टूटा। अंसारी उस समय फिर चर्चा में आ गए जब उनकी पार्टी कौमी एकता दल का विलय सपा में होने लगा, लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की हट की वजह से कौमी एकता दल का सपा में विलय नहीं हो सका।
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