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मानसून सत्र: भाजपा के सामने रहेंगी ये 5 चुनौतियां

संसद का मानसून सत्र बुधवार से शुरू होगा। इस सत्र में तीन तलाक, बलात्कार के दोषियों को सख्त सजा का प्रावधान , पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने संबंधी प्रावधान को पास कराने के लिए विपक्ष से सहयोग मांगा है।

मानसून सत्र: भाजपा के सामने रहेंगी ये 5 चुनौतियां

संसद का मानसून सत्र बुधवार से शुरू होगा। इस सत्र में तीन तलाक, बलात्कार के दोषियों को सख्त सजा का प्रावधान, पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने संबंधी प्रावधान को पास कराने के लिए विपक्ष से सहयोग मांगा है। जबकि टीडीपी ने सत्र शुरु होने पर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी मे है। वहीं साथ ही साथ कांग्रेस ने भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए आज बैठक बुलाया है। हम आपको उन विधेयकों के बारे में बतायेंगे जो संसद में पास होने के लिए लंबित है। और किन मुद्दों को लेकर सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड सकता है।

Monsoon Session Of Parliament 2018: उठेंगे ये सवाल

1.) मानसून सत्र मे सरकार का जोर अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित विधेयक को पारित कराने पर भी है। सरकार के एजेंडे में मेडिकल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग विधेयक और ट्रांसजेंडर के अधिकारों से जुड़ा विधेयक भी है। मॉनसून सत्र के दौरान आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2018 भी पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इसमें 12 साल से कम आयु की लड़कियों से बलात्कार के दोषियों के लिए मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा, सार्वजनिक परिसर अनधिकृत कब्जा को हटाने संबंधी संशोधन विधेयक 2017, दंत चिकित्सक संशोधन विधेयक 2017, जन प्रतिनिधि संशोधन विधेयक 2017, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट अमेंडमेंट विधेयक, नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक 2018, भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक 2018 को भी चर्चा एवं पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सत्र के दौरान चर्चा के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार :दूसरा संशोधन: विधेयक, महत्वपूर्ण बंदरगाह प्राधिकार विधेयक 2016, राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक 2017 आदि को पेश किया जा सकता है।

2.) आतंकवाद ,राम मंदिर, किसान,पेट्रोल डीजल के दाम में वृद्दि जैसे मुद्दे पर सरकार को घेरा जा सकता है।

3.) माकपा के लोकसभा सांसद मोहम्मद सलीम ने पहले ही कहा है, ‘हम संसद के दोनों सदनों में देश में पीट पीट कर जान लेने और सांप्रदायिक हिंसा के मुद्दों को उठाएंगे जिस पर प्रधानमंत्री को जवाब भी देना पड सकता है।

4.) लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मंगलवार को सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास होगा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित सभी दलों के नेताओं से सहयोग मांगा जाए। सदन के कामकाज में कौन सा विषय लेना है, कब लेना है। जिससे सदन का काम ठप्प ना हो और जो भी बिल संसद मे पेश होने है उन पर चर्चा भी अच्छी तरह पूरी की जा सके।

5.) संसद के शुरु होने से पहले ही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सांसदों के नाम एक पत्र लिखा है जिसमें उन्हे सांसदों से कहा है कि अगर सांसद अतीत में दूसरे दलों के आचरण का हवाला देते हुए व्यवधान को उचित ठहरायेंगे, तब संसद में ‘व्यवधान का चक्र’ कभी खत्म नहीं होगा, पिछले सत्र में तेलुगु देशम पार्टी ने सदन मे आंध्रप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों को लागू कराने के संदर्भ मे भारी हंगामा किया था इस बार देखना होगा कि इस मुद्दे पर क्या निष्कर्ष निकलता है।

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