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मनी मैनेजमेंट के 4 गुर

इससे आपके लिए मनी मैनेजमेंट आसान हो जाएगा।

मनी मैनेजमेंट के 4 गुर
नई दिल्ली. महीने की सैलरी अकाउंट में आती है, तब आप क्या करते हैं? तो हमारी कुछ प्राथमिकताएं पहले से तय होती हैं, जैसे- किराया, राशन, स्कूल फीस वगैरह। हम कुछ पैसे उन प्लान्स के लिए बचाते हैं जिन्हें हम आने वाले दिनों में अंजाम देने वाले हैं। आइए, हम आपके पैसों को अलग-अलग कैटिगरी में बांटने में आपकी मदद करते हैं। इससे आपके लिए मनी मैनेजमेंट आसान हो जाएगा।
1. स्पेडिंग मनी
इन पैसों को हमें पहले से तय घरेलू प्राथमिकताओं पर खर्च करना होता है। जैसे किराया, राशन, स्कूल फीस, दूध बिल आदि। लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए किए जाने वाले पेमेंट्स भी इसी कैटिगरी में आते हैं। इसके लिए अपनी सैलरी का 20-30} हिस्सा तय करें और इसी में से खर्च करने की कोशिश करें।
2. शॉर्ट टर्म मनी
एक से पांच साल के अंदर होने वाले खर्च के लिए आपको नियमित रूप से पैसे अलग से निकाल कर रखिए। जैसे, कार खरीदने के लिए या घर का डाउन पेमेंट करने के लिए। इसके लिए आरडी या एफडी यूज करें। आप कुछ सुरक्षित डेट फंड्स भी चुन सकते हैं क्योंकि इन पर टैक्स बहुत कम लगता है।
3. लॉन्ग टर्म मनी
रिटायरमेंट के लिहाज से सेविंग, बच्चों की हायर एजुकेशन और शादी के लिए इकट्ठा किए जाने वाले पैसे लॉन्ग टर्म मनी की कैटिगरी में आते हैं। लॉन्ग टर्म मनी इन्वेस्ट या सेव करते वक्त आपको मंहगाई को भी ध्यान में रखना चाहिए। क्योंकि मंहगाई बढ़ने के साथ ही आपके पैसे की वैल्यू भी कम हो जाएगी। लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न पाने का सबसे अच्छा जरिया शेयर मार्केट में पैसे इन्वेस्ट करना। पर सोच कर करें।
4. टैक्स सेविंग मनी
लॉन्ग टर्म सेविंग्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार हमें टैक्स ब्रेक्स देती है। कई ऐसे टैक्स सेविंग स्कीम्स हैं जहां निवेश कर सालाना करीब पांच लाख तक निवेश पर टैक्स छूट पा सकते हैं। यह भी एक तरह से लॉन्ग टर्म मनी ही है। इन चारों को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका है म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करना है। लेकिन यह बाजार के जोखिमों पर निर्भर है।
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