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मोदी ने पुतिन को याद दिलाई अटल से मुलाकात, कहा- आप 18 सालों से हमारे करीब

पीएम मोदी की विदेशी रिश्तों की शुरुआत रूस से ही हुई थी। यह उनका चौथा रूस दौरा है।

मोदी ने पुतिन को याद दिलाई अटल से मुलाकात, कहा- आप 18 सालों से हमारे करीब
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए सोमवार सुबह काला सागर के तटीय शहर सोची पहुंचे। अपने अनौपचारिक दौरे पर रूस के सोचि में पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को चौथी बार रूस के राष्ट्रपति बनने के लिए बधाई दी।
बता दें कि पीएम मोदी की विदेशी रिश्तों की शुरुआत रूस से ही हुई थी। यह उनका चौथा रूस दौरा है। इससे पहले मोदी 27-28 अप्रैल को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से वुहान में मिले थे। इस औपचारिक यात्रा से एशिया में शक्ति के संतुलन के बीच भारत, रूस और चीन के बीच बराबरी की श्रेणी में खुद को बनाए रखने का प्रयास करेगा। साथ ही इस मुलाकात पर दुनिया की नजर भी रहेगी।

चौथे कार्यकाल पर पुतिन को दी बधाई

अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने व्लादिमीर पुतिन को उनके पहले भारत दौरे और तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात की भी याद दिलाई। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा, 'मुझे फोन पर बधाई देने का अवसर मिला था, लेकिन आज मिलकर बधाई देने का सौभाग्य मिला। साल 2000 में पदभार संभालने के बाद से आपका भारत के साथ अटूट रिश्ता रहा है।'
पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि पहली बार रूस के राष्ट्रपति बनने के बाद आप भारत गए थे, उस समय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। उस दौरान आपने भारत को जीवंत लोकतंत्र बताया था। इसको लेकर भारत के लोग आज भी आपको याद करते हैं। भारत और रूस बहुत पुराने दोस्त हैं। इनका रिश्ता अटूट है।
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मेरे बेहद करीबी दोस्त भी हैं। सोचि में अनौपचारिक मुलाकात के लिए आमंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति पुतिन का शुक्रिया।

पीएम ने एक दिन पहले किया ट्वीट

मोदी ने एक दिन पहले ट्वीट किया था, ‘रूस के मित्रवत लोगों को नमस्कार। मैं सोची के कल के अपने दौरे और राष्ट्रपति पुतिन के साथ अपनी मुलाकात के प्रति आशान्वित हूं। उनसे मिलना मेरे लिये हमेशा सुखदायी रहा है।'
उन्होंने लिखा, ‘मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार युक्त रणनीतिक भागीदारी और अधिक मजबूत होगी।

एससीओ की सदस्यता रूस की बदोलत

अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत को शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की स्थायी सदस्यता दिलाने में रूस ने अहम भूमिका दिलाई। हम इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) और ब्रिक्स (ब्रिक्स) के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच वार्ता का केंद्र ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका के पीछे हटने का जो प्रभाव पड़ेगा उसके सहित विभिन्न वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दे हैं। अन्य वैश्वविक मुद्दों में सीरिया और अफगानिस्तान के हालात, आतंकवाद के खतरे जैसे विषयों पर भी हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अनौपचारिक वार्ता का लक्ष्य दोनों देशों के बीच आपसी दोस्ती एवं विश्वास के बूते महत्वपूर्ण वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा राय बनाना है।

क्या है एससीओ और उसका उद्देश्य

शंघाई सहयोग संगठन में आठ देश सदस्य हैं जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग करना है। भारत और पाकिस्तान पिछले वर्ष इस संगठन में शामिल हुए थे। एक तरफ चीन अपने महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट बेल्ड ऐंड रोड इनिशटिव (बीआरआई) के जरिए एशिया, अफ्रीका और यूरोप में अपना कारोबार बढ़ाना चाहता है। हालांकि उसकी मंशा पर भारत समेत कई देशों को संदेह है।
भारत ने इसका विरोध भी किया है क्योंकि इसमें शामिल चीन-पाक आर्थिक कॉरिडोर पीओके से होकर गुजर रहा है। ऐसे में भारत और रूस समेत कई देश मिलकर 7200 किमी लंबे इंटरनैशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपॉर्ट कॉरिडोर पर काम कर रहे हैं। यह शिप, रेल और सड़क मार्ग का मल्टी-मोड नेटवर्क है।

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