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अमृतसर पहुंचे पीएम मोदी, गुरुद्वारे में खिलाया लंगर

सम्मलेन में भारत आतंकवाद और नगरोटा हमले पर पाकिस्तान को घेरेगा।

अमृतसर पहुंचे पीएम मोदी, गुरुद्वारे में खिलाया लंगर
अमृतसर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'हार्ट ऑफ एशिया' सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमृतसर पहुंच गए हैं। पीएम मोदी जब राजासांसी एयरपोर्ट पर पहुंचे तब उनका स्वागत पंजाब के राज्यपाल बीपी सिंह बदनौर, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। मोदी होटल रेडिशन ब्ल्यू में रविवार को 'हार्ट ऑफ एशिया' के मुख्य सम्मेलन का अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ शुभारंभ करेंगे। अमृतसर पहुंचने के बाद उन्होंने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ मुलाकात की।
उसके बाद देर शाम पीएम मोदी और अफगिस्तान के राष्ट्रपति गोल्डन टेम्पल में माथा टेकने पहुंचे। यहां पीएम ने लंगर भी खिलाया।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
आपको बता दें, आज सम्मेलन का अधिकारियों की बैठक के साथ शुरूआत हुई। हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में भारत, चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान समेत 14 देशों के सीनियर ऑफिशियल्स और 17 सहायक देशों के रिप्रेंजेटेटिव्स शिरकत कर रहे हैं। बैठक में रविवार को हाेने वाले मुख्य सम्मेलन के लिए मुद्दे तय किए गए।
* अफगानिस्तान में शांति बहाली के प्रॉसेस को नए सिरे से शुरू करना।
* अफगानिस्तान का साउथ और सेंट्रल एशिया के देशों से जुड़ाव और उनके साथ ट्रेड बढ़ाने पर जोर।
* एशिया में आतंकवाद, कट्टरता और उग्रवाद के बढ़ते खतरे से निपटना।
* सुरक्षा और संपन्नता इस कॉन्फ्रेंस की थीम है।
* पांच देशों के चाबहार रेलवे प्रोजेक्ट और तापी (TAPI- तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत) गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर भी चर्चा होगी।
इन मुद्दों पर पाक को घेरेगा भारत
* नगरोटा में आतंकी हमला।
* आतंकवाद का लगातार पोषण और बढ़ावा देना।
* सीमापार से लगातार घुसपैठ।
* सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन।
* नशीले पदार्थ की तस्करी।

ऐसे हुई 'हार्ट आफ एशिया' कि शुरुआत
'हार्ट आफ एशिया' की स्थापना 1 नवंबर, 2011 को अफगानिस्तान के शहर इस्तांबुल में 14 देशों ने मिल कर रखी थी। इसमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, अजरबैजान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल थे। इन देशों ने आतंकवाद रोकने, नशीले पदार्थों पर रोक, आपदा प्रबंधन, व्यापार-निवेश को बढ़ावा, विकास का ढांचा तैयार करने और शिक्षा का विस्तार जैसी छह प्राथमिकताओं को चुना था। इसकी सदस्य संख्या अब 40 तक पहुंच चुकी है।
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