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समिति की सिफारिश पर ''दिवालिया कानून'' में संशोधन करेगी मोदी सरकार

आईबीसी के कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं की पहचान और इस पर सुझाव देने के लिए 14 सदस्यीय समिति काम कर रही है। इसके अध्यक्ष भी श्रीनिवास है।

समिति की सिफारिश पर

दिवालिया कानून की समीक्षा के लिए गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर कानून में संशोधन किया जा सकता है, जिसमें घर के खरीदारों के अधिकार से संबंधित विषय भी शामिल हो सकते हैं।

कॉरपोरेट मामलों के विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही। कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा कि ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत सब कुछ समयबद्ध है लेकिन मुद्दा यह है कि कैसे हितधारकों के हितों को संतुलित किया जाए।

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कानून ऋणदाताओं के बहुत कम पक्ष में

आईबीसी के कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं की पहचान और इस पर सुझाव देने के लिए 14 सदस्यीय समिति काम कर रही है। इसके अध्यक्ष भी श्रीनिवास है।

आईबीसी दिसंबर 2016 में लागू हुआ था। श्रीनिवास ने बताया, ऐसा लग रहा है कि यह कानून वित्तीय ऋणदाताओं के बहुत कम पक्ष में है।

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अपेक्षाओं पर नहीं उतरा खरा

यह पर्याप्त रूप से अन्य हितधारकों की आवश्यकताओं या अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहा है। यह एक गंभीर क्षेत्र है जिसे हम देख रहे हैं।

समिति सभी मुद्दों को देख रही है। श्रीनिवास के मुताबिक प्रतिस्पर्धा, नियामकीय मंजूरी, कर देनदारी और अन्य पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।

आईबीसी में हो सकता है बदलाव

श्रीनिवास ने कहा, दिवालियापन कानून से संबंधित समिति की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में आईबीसी में बदलाव किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, घर खरीदारों के अधिकार क्या हैं? दिवाला पेशेवरों की क्षमता क्या है? ये उन मुद्दों में से हैं जिन्हें देखा जाना चाहिए।

हाल के महीनों में अधूरे रीयल्टी परियोजनाओं को लेकर घर खरीदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ रीयल्टी फर्मों को दिवालियापन प्रकिया का भी सामना करना पड़ रहा है।

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