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पीएम मोदी का देश के नाम संदेश

किसानों के कर्ज को लेकर कोई अहम ऐलान कर सकते हैं मोदी।

पीएम मोदी का देश के नाम संदेश
नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम संदेश दे रहे हैं। माना जा रहा है कि मोदी मिडिल क्लास और किसानों के कर्ज को लेकर कोई अहम एलान कर सकते हैं। 30 दिसंबर को 500-1000 के पुराने नोट बैंक में जमा करने का आखिरी दिन था। 8 नवंबर को मोदी ने देश के नाम संदेश में 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का एलान किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नौ नवंबर बाद से उन्हें हजारों लाखों चिट्ठियां भी मिली हैं। इनमें लोगों ने कई तरह की बातें लिखी हैं।निश्चित तौर पर देशवासियों को कष्ट झेलना पड़ा है।
लेकिन देशवासियों में इसमें आगे-बढ़कर भाग लिया, कष्ट झेला। देशवासियों ने इस दौरान लोगों ने त्याग की मिसाल पेश की है।
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह आश्वासन दिया कि सरकार ने आगामी दिनों में बैंकिंग को सामान्य करने के लिए सारी व्यवस्‍थाएं कर दी गई हैं।
सरकार ने इस विषय से संबंधित सभी जिम्मेदार लोगों से बात की है। खासकर गांव और दूरदराज की परेशानियों को तत्काल खत्म करने के बारे में भी बात की गई है।
जनता ने तकलीफ सहकर उज्जवल भविष्य की आधारशिला रखी
मोदी ने कहा कि देश की जनता ने तकलीफ सहकर उज्जवल भविष्य की आधारशिला रखी है। इस काम में सरकार और जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ रहे थे। भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह आश्वासन दिया कि सरकार ने आगामी दिनों में बैंकिंग को सामान्य करने के लिए सारी व्यवस्‍थाएं कर दी गई हैं। सरकार ने इस विषय से संबंधित सभी जिम्मेदार लोगों से बात की है। खासकर गांव और दूरदराज की परेशानियों को तत्काल खत्म करने के बारे में भी बात की गई है।
आज शास्त्री, लोहिया होते तो देश को आशीर्वाद देते
नरेंमद्र मोदी ने कहा कि विश्व में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिससे इसकी तुलना की जाए। हमारी अर्थव्यवस्था में बढ़े हुए नोट मंहगाई, कालाबजारी बढ़ा रहे थे देश के गरीब से उसका अधिकार छिन रहे थे। अर्थव्यवस्था में नकद का अभाव तकलीफदेह है। कैश का प्रभाव इससे ज्यादा तकलीफदेह होता है। हमारा प्रयास है कि इसका संतुलन बना रहे हैं। अगर आज लाल बहादुर शास्त्री, राम मनोहर लोहिया होते तो देश को आशीर्वाद देते।
देश में 24 लाख लोग 10 लाख से ज्यादा कमाते हैं
प्रधानमंत्री ने कहा, हम कबतक सच्चाईयों से मुंह मोड़ते रहेंगे। इसे सुनने के बाद आप हसंगें या गुस्सा आयेगा। देश में सिर्फ 24 लाख लोग स्वीकारते हैं कि उनकी आय दस लाख रूपये से ज्यादा है। आप भी अपने आस पास बड़ी- बड़ी गाड़ियां, कोठियां है। आपको अपने शहर में कई लोग मिलेंगे जो 10 लाख से ज्यादा कमाते हैं। कानून कानून का काम पूरी कठोरता से करेगा। सरकार के लिए इस बात की प्राथमिकता है कि ईमानदारों को मदद और सुरक्षा कैसे मिले।
हिंसा छोड़ नौजवान मुख्य धारा में लौट रहे हैं
देश में नागरिकों से ज्यादा जिम्मेदारी अफसरों की है। ईमानदारों की मदद हो, बेईमान अलग थलग हो। पूरी दुनिया में सर्व सामान्य तथ्य है कि आतंकवाद, नक्सलवाद, हथियार के कारोबार में जुड़े लोग कालेधन पर ही निर्भर रहते हैं यह समाज के लिए नासूर बन गया है। एक फैसले ने बड़ी चोट पहुंचाई है। काफी संख्या में नौजवान हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पिछले कुछ दिनों के तथ्यों से यह साफ है कि बईमानी से अपना रास्ता खोजने वाले फंस गये हैं। टेकनोलॉजी ने काफी मदद की है। उन्हें मुख्यधारा में वापस आना होगा।
मध्यम और निम्नमध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर काम करे बैंक
बैंक कर्मचारियों ने इस दौरान काफी मेहनत की। सभी ने सराहणीय काम किया है। कुछ बैंको के गंभीर अपराध भी शामिल आए हैं। ऐसे लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर हैं आग्रह पूर्वक एक बात कहना चाहता हूं कि इतिहास गवाह है कि हिंदुस्तान के बैंकों में एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में इतने कम समय में कभी नहीं आया था। बैंकों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए आग्रह है कि निम्न मध्यमवर्ग और मध्यमवर्ग को ध्यान में रखकर काम करे। बैंक लोकहित के गरीब कल्याण के इस अवसर को हाथ से ना जाने दे।
दोषी बैंक कर्मचारियों को छोड़ा नहीं जाएगा
कुछ बैंक कर्मचारियों के गंभीर अपराध सामने आए हैं और फायदा उठाने का निर्लज्ज प्रयास किया। दोषी बैंक कर्मचारियों को छोड़ा नहीं जाएगा, उन्हें कठोर सजा दी जाएगी। बैंकों से कहना चाहता हूं कि इतने कम समय में इतनी बड़ी मात्रा धन कभी उनके पास नहीं आया था। बैंक अपने परंपरागत कामों को करने के साथ गरीबों की मदद के लिए सामने आए।
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