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आधुनिक अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पूरी तरह से बिजली पर निर्भर: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने आज कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है।

आधुनिक अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पूरी तरह से बिजली पर निर्भर: उपराष्ट्रपति
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उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने आज कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। नायडू ने कहा कि यदि कोई एक विचार या खोज, आधुनिकता को परिभाषित कर सकती है तो वह है 'विद्युत'। हमारी आधुनिक अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। बिजली के बिना आज जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय रहा है कि आज़ादी के कई दशकों बाद तक भी, देश की बड़ी आबादी को बिजली उपलब्ध नहीं थी। आधुनिक जीवन की इस महत्वपूर्ण आवश्यकता से आबादी का एक बड़ा भाग लंबे समय तक वंचित रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी देश के विकास का मापदंड उस देश में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत भी होती है। पूरे विश्व मे ऊर्जा की खपत का औसत 2600 यूनिट प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति है, वहीं भारत में यह खपत मात्र 880 यूनिट है जो विश्व के औसत का लगभग एक तिहाई है। मैं समझता हूँ कि देश के विकास के लिए विद्युत का देश की आबादी के हर भाग तक पहुँचना बहुत आवश्यक है।'
उपराष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के नये भवन के लोकार्पण के मौके पर कहा,‘‘ मैं समझता हूँ कि देश के विकास के लिए विद्युत का देश की आबादी के हर भाग तक पहुँचना बहुत आवश्यक है। मुझे संतोष है कि इस दिशा में और 100 प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण के वास्ते महत्वपूर्ण प्रयास शुरु हो चुके है। 100 प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण का जो लक्ष्य 2009 तक पूर्ण हो जाना चाहिए था, वह अंतत: 29 अप्रैल, 2018 को पूर्ण हुआ। आज हम देश में 100 प्रतिशत गाँवों का विद्युतीकरण कर चुके हैं। नि:संदेह यह एक बड़ी उपलब्धि है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत के तीव्र विद्युतीकरण अभियान की सराहना की गयी है।
इस रिपोर्ट के अनुसार 85 प्रतिशत घरों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। सरकार का प्रयास है कि दिसंबर 2018 तक देश के हर घर तक बिजली पहुँचे। भारत सरकार 2022 तक सभी को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर समर्पित रूप से काम कर रही है।'
नायडू ने कहा,'पूर्व में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में विद्युतीकरण की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है लेकिन अक्तूबर 2017 के बाद विद्युतीकरण के अभियान में प्रदेश में बहुत तेजी आयी है। पहले जहाँ प्रतिमाह 10 हजार से भी कम घरों को विद्युत कनेक्शन दिया जाता था, वह अब प्रतिमाह पांच लाख से ऊपर पहुँच गया है।'
उन्होंने कहा ,‘‘हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि विद्युत अक्षय संसाधन नहीं है। विद्युत क्षेत्र का अपना एक अर्थतंत्र है। विद्युत क्षेत्र का एक वित्तीय आयाम भी है जिसे बहुत समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर हर घर तक बिजली पहुँचानी है तो उसे इतना सस्ता भी बनाना होगा जिससे न तो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़े और साथ ही बिजली उत्पादक तथा वितरक कंपनी की आवश्यक लागत भी वसूल हो जाए।'
उपराष्ट्रपति ने कहा,‘‘ ऊर्जा के क्षेत्र में अभी तक हम सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति पर ही बल दे रहे हैं जैसे उत्पादन और वितरण। अब समय की आवश्यकता है कि हम बिजली की मांग को भी संयमित करने पर विचार करें। ऊर्जा के स्रोत-संसाधन सीमित हैं। अत: हम अपनी जीवनशैली में मूलभूत सुधार लायें और परिवेश को ऊर्जा दक्ष बनाएं। उपराष्ट्रपति ने बाद में आज शाम लखनऊ के पूर्व सांसद लाल जी टंडन द्वारा लिखित पुस्तक 'अनकहा लखनऊ' का लोकार्पण भी किया।

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