Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

मिजोरम नतीजे / ''उग्रवादी'' थे जोरमथांगा, फिर से बनेंगे CM, जानिए उनके बारे में खास बातें

मिजोरम विधानसभा चुनाव 2018 के लिए मतगणना मंगलवार को पूरी हो गई। 40 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस की सरकार मुंह के बल गिर गई है। मिजोरम में मुख्य विपक्षी दल मिजो नेशनल फ्रंट ने 26 सीटों पर जीत हासिल करके पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है।

मिजोरम नतीजे /
X
मिजोरम विधानसभा चुनाव 2018 के लिए मतगणना मंगलवार को पूरी हो गई। 40 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस की सरकार मुंह के बल गिर गई है। मिजोरम में मुख्य विपक्षी दल मिजो नेशनल फ्रंट ने 26 सीटों पर जीत हासिल करके पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है।
वहीं 2013 में 34 सीटें जीतकर सत्ता में आने वाली कांग्रेस 5 सीटों पर सिमट कर रह गई है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री ललथनहवला अपनी सीट को भी नहीं बचा पाए। एमएनएफ 10 साल पहले सत्ता में थी। वह अब दोबार सत्ता में वापसी कर रही है। एमएनएफ जीती है तो यह तय है कि MNF नेता जोरामथांगा एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।
उन्होंने आइजोल ईस्ट-1 से चुनाव जीता है। उन्हों ने निर्दलीय प्रत्याशी के सपंदगा को हराया है। लेकिन जोरामथंगा एक विवादित नेता हैं। जानते हैं उनसे जुड़े विवाद के बारे में। मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री और एमएनएफ नेता जोरामथांगा का जन्म 13 जुलाई 1944 में हुआ था। दिसंबर 1998 से दिसंबर 2008 तक वह मुख्यमंत्री थे।

Mizoram Election Result / जानिए- मिजोरम में कौन जीता कौन हारा, यहां देखें नए विधायकों की पूरी लिस्ट

उनकी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट 2008 में कांग्रेस से हार गई थी। लेकिन मिजो नेशनल फ्रंट एक प्रतिबंधित संगठन था और गुप्त रूप से अलग देश की मांग के लिए सक्रिय था। 1966 में स्नातक करने के बाद उन्होंने संगठन को ज्वाइन कर लिया। तीन वर्ष तक उन्होंने इलाके के सचिव की जिम्मेदारी संभाली।

1969 में मिजो नेशनल फ्रंट के सभी कैडर तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) चले गए। बाद में मिजो नेशनल फ्रंट के तत्कालीन अध्यक्ष लालडेंगा ने जोरमथंगा को अपना सचिव बना लिया। जिस पद पर वो सात सालों तक रहे। 1979 में वह मिजो नेशनल फ्रंट के उपाध्यक्ष बने।

सेना ने गिरफ्तार किया

विद्रोह के दौरान सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 25 वर्षों के संघर्ष के बाद 30 जून 1986 को मिजो शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया गया और फिर 1987 में उसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। समझौते के बाद जोरमथंगा राजनीति में आ गए और पहली ही बार में चंफई से विधायक बने।
लालडेंगा मुख्यमंत्री थे उस समय जोरामथंगा को वित्त और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1990 में लालडेंगा की मृत्यु के बाद जोरमथंगा मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष बने। 1998 में विधानसभा चुनाव से पहले जोरमथंगा ने मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस से गठजोड़ किया।

मिजोरम मे कांग्रेस का ये प्रत्याशी सिर्फ 3 वोटों से हार गया

इस सियासी गठजोड़ के बलपर उन्होंने 33 सीटें जीत ली और पहली बार मुख्यमंत्री बने। 2003 में उन्होंने बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ने का फैसला किया। वह फिर एक बार मुख्यमंत्री बने। 2008 के मिजोरम विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 3 सीटें हासिल की।
अब 10 साल बाद वह एक बार फिर जीत गए हैं। और मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी क्योंकि उनके पास अकेले सरकार बनाने के लिए बहुमत है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top