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मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर दी बधाई, ये हैं ग़ालिब की बेहतरीन गज़लें

दुनिया के सबसे अजीम शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर बधाई दी है इसी मौके पर पढ़िए मिर्ज़ा ग़ालिब की पांच बेहतरीन गज़लें।

मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर दी बधाई, ये हैं ग़ालिब की बेहतरीन गज़लें

ये इश्क़ नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए...

इक आग का दरिया है और डूबकर जाना है... जी हां ये गज़ल है दुनिया के सबसे अजीम शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की। ग़ालिब साहब के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें बधाई दी है। मिर्ज़ा साहब जिस महफ़िल में जाते थे वहां के सारे चराग अपने आप रोशन हो जाते थे।

ग़ालिब साहब शेर-ओ-शायरी की दुनिया के बादशाह रहे हैं, मिर्ज़ा ग़ालिब का आज 220वां जन्मदिवस है। 27 दिसंबर 1796 में उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्में मिर्ज़ा ग़ालिब का पूरा नाम असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ ग़ालिब था। ग़ालिब साहब के बारे में जितना कहा जायेगा उतना ही काम है। आइये पढ़ते हैं मिर्ज़ा ग़ालिब के बेहतरीन गज़लें...

दिया है दिल अगर

दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये

हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहिये...

यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे

काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये...

ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब

की बिन कहे ही उन्हें सब खबर है , क्या कहिये...

हसरत दिल में है

सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है

बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है...

देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा

मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है...

आगे स्लाइड्स में पढ़िए मिर्ज़ा ग़ालिब की चुनिंदा शायरी...

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