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नोटबंदी से बेरोजगार हुए मनरेगा मजदूर, 23 फीसदी घटा काम

मनरेगा के तहत मिलने वाले काम में 55 फीसदी की गिरावट आई है।

नोटबंदी से बेरोजगार हुए मनरेगा मजदूर, 23 फीसदी घटा काम
नई दिल्ली. नोटबंदी से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा) पर काफी असर पड़ा है। रोजगार की गारंटी देने वाली इस स्कीम में पिछले महीने के मुकाबले नवंबर में 23 प्रतिशत रोजगार घटा है। नोटबंदी से बेरोजगार लोगों की संख्या 23.4 लाख हो गई, जो कि अक्टूबर से दोगुनी है। इतना ही नहीं, पिछले साल नवंबर से यदि तुलना करें तो मनरेगा के तहत मिलने वाले काम में 55 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
ये आंकड़े बयां कर रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी के चलते गरीब, बेसहारा, मनरेगा पर निर्भर लोगों को काफी बुरा असर सहना पड़ रहा है। झारखंड के सिंहभूमि जिले की सुनिया लगूरी बताती हैं, अगर मनरेगा के तहत काम उपलब्ध रहता तो हमें कम से कम कुछ राहत मिलती, अभी हम थोड़ी-बहुत मजदूरी 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कर रहे हैं। ज्यादातर वक्त खाली बैठे ही बीत रहा है।'
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मंगू राम का कहना है कि, 'शुरुआत के काफी दिन हमने उधार लेकर काम चलाया, लेकिन अब नोटबंदी के पांचवे हफ्ते हालात बद से बदतर होते दिख रहे हैं।' बता दें कि वित्त वर्ष 2015-16 में इस योजना पर सबसे ज्यादा यानी 56,000 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसमें 12,000 करोड़ रुपए बकाया मजदूरी के भुगतान पर खर्च हुए। इस स्कीम से वर्ष 2015-16 में पिछले 5 साल में सबसे अधिक रोजगार मिला। हालांकि, रोजगार गारंटी स्कीम समय पर भुगतान के मामले में लगातार पिछड़ती जा रही है और अब तक सिर्फ 34.3 फीसदी भुगतान समय पर दिया गया है।
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