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Merry Christmas 2018 : अनाथालय में पले-बढ़े सांता क्लॉज का इतिहास, बने थे सबसे कम उम्र के पादरी

सांता क्लॉज यानी संत निकोलस का जन्म 300 ईसा पूर्व तुर्किस्तान के मायरा शहर में एक रईस परिवार में हुआ था किंतु दुर्भाग्यवश बचपन में ही मां-बाप का निधन हो जाने के कारण उनकी परवरिश एक अनाथालय में हुई। 17 साल में वे अपने नगर के चर्च में पादरी बन गए।

Merry Christmas 2018 : अनाथालय में पले-बढ़े सांता क्लॉज का इतिहास, बने थे सबसे कम उम्र के पादरी
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क्रिसमस (Christmas) यानी दुनिया भर में सबसे धूम-धाम से मनाया जाने वाला त्योहार। ईसाई धर्मावलंबी क्रिसमस उत्सव की शुरुआत चर्च में प्रार्थना सभा के साथ करते हैं। प्रभु यीशु की प्रशंसा में ‘कैरोल’ यानी जन्मदिन के विशेष गीत गाते हैं। क्रिसमस पार्टियों का आयोजन करने के साथ प्यार और भाईचारे का संदेश देते हुए घर-घर जाकर एक-दूसरे को क्रिसमस की बधाइयां और उपहार देते हैं और क्रिसमस केक काटते हैं। कहा जाता है कि क्रिसमस का सबसे पहला उत्सव 336 ई. में रोम में मनाया गया था। सांता क्लॉज और क्रिसमस ट्री इस उत्सव की पहचान होते हैं। इनके बिना इस पर्व की खुशियां अधूरी ही रहती हैं।

सांता क्लॉज का इतिहास

सांता क्लॉज यानी संत निकोलस का जन्म 300 ईसा पूर्व तुर्किस्तान के मायरा शहर में एक रईस परिवार में हुआ था किंतु दुर्भाग्यवश बचपन में ही मां-बाप का निधन हो जाने के कारण उनकी परवरिश एक अनाथालय में हुई। 17 साल में वे अपने नगर के चर्च में पादरी बन गए।

कहा जाता है कि दयालु और परोपकारी स्वभाव के निकोलस गरीब और जरूरतमंदों की मदद को हमेशा तैयार रहते थे। ईसा का यह प्रबल अनुयायी ईसा जयंती के दिन किसी भी व्यक्ति को धन की कमी के कारण त्योहार मनाने से वंचित नहीं देखना चाहता था।

सांता क्लॉज का इतिहास

पर अपनी पहचान भी लोगों के सामने नहीं लाना चाहता था, इस कारण उन्होंने लाल रंग की विशेष पोशाक में अपना हुलिया छुपाकर रात के अंधेरे में गरीबों के घर उपहार बांटना शुरू कर दिया।

सफेद फर से सजी लाल रंग की चोगानुमा ड्रेस पहनकर क्रिसमस पर लोगों, खासतौर पर बच्चों को उपहार बांटने वाले सांता क्लॉज की लोकप्रियता एक विनम्र और सहृदय संत की है।

सांता क्लॉज का इतिहास

19वीं सदी से पहले अमेरिका, योरोप के देशों के लोग मानते थे कि सांता नॉर्थ पोल यानी उत्तरी ध्रुव के बर्फीले इलाके में रहते हैं और वे हर साल क्रिसमस पर अपने उड़ने वाले चमत्कारी रथ पर बैठ कर लोगों के बीच उपहार बांटने आते हैं।

आज उनका जो स्वरूप दिखता है, वह बीती सदी में प्रचलित हुआ माना जाता है। सांता बच्चों को बहुत प्यार करते हैं क्योंकि वे उन्हें ईश्वर का प्रतिरूप मानते हैं।

क्रिसमस ईव की पूर्व संध्या पर बच्चों को खिलौने, कुकीज, केक, बिस्कुट, कैंडी, चॉकलेट आदि तरह तरह के उपहार बांटने वाले सांता, जिंगल बेल-जिंगल बेल गाते हुए उपहारों का थैला अपने कंधे पर टांगे जैसे ही किसी क्रिसमस पार्टी में पहुंचते हैं, वहां मौजूद बच्चों के चेहरे खुशी से खिल जाते हैं।

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