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मेहुल चाेकसी नागरिकता छोड़ने पर भी नहीं बच पाएगा

Mehul Choksi Antigua Citizenship अगर कोई सोचता है कि भारत में आर्थिक अपराध करके वह बच जाएगा, तो ख्याली पुलाव पकाने जैसा है। 13700 करोड़ रुपये के पीएनबी धांधली के आरोपित मेहुल चाेकसी (mehul choksi) भारतीय कानून से बचने के लिए एक के बाद एक तिकड़म अपना रहा है। पीएनबी के फ्रॉड सामने आने के पहले ही नीरव मोदी व मेहुल चौकसी भारत से भाग गए थे, फ्रॉड का खुलासा हुआ तो दोनों ने खुद को पाक-साफ बताने की कोशिश की।

मेहुल चाेकसी नागरिकता छोड़ने पर भी नहीं बच पाएगा

Mehul Choksi Antigua Citizenship

अगर कोई सोचता है कि भारत में आर्थिक अपराध करके वह बच जाएगा, तो ख्याली पुलाव पकाने जैसा है। 13700 करोड़ रुपये के पीएनबी धांधली के आरोपित मेहुल चाेकसी (mehul choksi) भारतीय कानून से बचने के लिए एक के बाद एक तिकड़म अपना रहा है। पीएनबी के फ्रॉड सामने आने के पहले ही नीरव मोदी व मेहुल चौकसी भारत से भाग गए थे, फ्रॉड का खुलासा हुआ तो दोनों ने खुद को पाक-साफ बताने की कोशिश की।

नीरव मोदी अभी भी आंख-मिचौली खेल रहा है, लेकिन मेहुल चोकसी ने पहले कैरेबियाई देशों के कई टैक्स हैवन माने जाने वाले देशों में से शुमार एंटीगुआ की नागरिकता ली और उसके बाद अब इस साल जनवरी में भारतीय पासपोर्ट (जेड 3396732) सरेंडर कर भारत की नागरिकता छोड़ दी है। लेकिन मेहुल भूल जाता है कि जिस वक्त उसने पीएनबी फ्रॉड किया, उस वक्त वह भारत का नागरिक था।

इसलिए उसका भारतीय कानून से बचना मुश्किल है। यूं तो उसने प्रत्यर्पण से बचने के लिए यह कदम उठाया है, लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दोहराया है कि भले ही थोड़ा वक्त लग जाय पर भगोड़ों को भारतीय कानून के कटघरे में लाया जाएगा। केंद्र की राजग सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून को मजबूत किया है।

इस वक्त यह कानून इतना सख्त है कि किसी भी आर्थिक भगोड़े के लिए इससे बच पाना कठिन है। भारत के दबाव के बाद एंटीगुआ सरकार ने भरोसा दिया कि अगर मेहुल चोकसी भारत का अपराधी है, तो उसकी नागरिकता पर सरकार पुनर्विचार करेगी। वैसे भी एंटीगुआ संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है, इसलिए हर अंतरराष्ट्रीय कानून मानने को बाध्य है।

भारत की अपील पर इंटरपोल ने पिछले महीने दिसंबर में चौकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। उस वक्त भी वह भारत का नागरिक था। जिसका मतलब यह है कि उसे हिरासत में ले लिया जाएगा और भारत को सौंप दिया जाएगा। भारत सरकार के मुताबिक नागरिकता छोड़ने जैसी चालबाजी से मेहुल के घोटाले के आरोपित होने की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक किसी भी देश के, किसी भी आरोपित को, किसी भी देश में प्रत्यर्पित किया जा सकता है। मेहुल चोकसी के मामले में भी यह लागू होगा। उसने अपराध भारत में किया है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का आरोपित की नागरिकता से कोई संबंध नहीं है। एक आरोपी होने के नाते मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण किया जा सकता है।

सबसे हालिया उदाहरण क्रिश्चियन मिशेल का है। वह ब्रिटिश नागरिक है और दुबई में रह रहा था, लेकिन उसे अगस्ता वेस्टलैंड भ्रष्टाचार मामले में पूछताछ के लिए दुबई से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। विजय माल्या के मामले में भी कानून अपना काम कर रहा है और तेजी से शिकंजा कसा जा रहा है। चोकसी ने साल 2017 में ही एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी और चार जनवरी 218 को भारत छोड़ा था।

एंटीगुआ के कानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को नागरिकता मिलने के बाद निष्ठा की शपथ भी लेनी पड़ती है। एंटीगुआ ने कहा था कि चोकसी ने यह शपथ 15 जनवरी, 2018 को ली थी।

एंटीगुआ के प्रशासन का दावा है कि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और सेबी से हरी झंडी मिलने के बाद ही नागरिकता दी गई। पीएनबी का फ्रॉड उसके बाद सामने आया।

इससे साफ है कि मेहुल योजनाबद्ध तरीके से बैंक को चूना लगाया। वह देश छोड़ने का प्लान पहले ही बना चुका था। आज भले ही नागरिकता छोड़ी हो, लेकिन मेहुल प्रत्यर्पण से बच नहीं पाएगा।

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