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मोदी से मिलीं महबूबा, कहा- जान बचाने के लिए लगाया कर्फ्यू

पीएम से मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि पीएम कश्मीर के हालात को लेकर चिंतित हैं।

मोदी से मिलीं महबूबा, कहा- जान बचाने के लिए लगाया कर्फ्यू
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नई दिल्ली/ कश्मीर. घाटी में करीब दो महीने से जारी हिंसा और तनाव के बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पीएम से मिलकर घाटी के हालातों पर चर्चा की। पीएम से मुलाकात के बाद महबूबा ने कहा, 'जितनी तकलीफ हमें है, उतनी ही तकलीफ उन्हें (पीएम मोदी) को भी है। जो लोग मर रहे हैं वे हमारे बच्चे हैं।' कर्फ्यू लगाने का मकसद यह है कि लोगों की जान बची रहे, इसलिए कर्फ्यू लगाया गया। क्योंकि हमारे पास कर्फ्यू लगाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
महबूबा ने मीडिया से अपील की माहौल को बेहतर करने के लिए सहयोग करें। उन्होंने मीडिया से कहा-मेरी मदद कीजिए. बता दें कि यह दूसरी बार है जब कश्मीर के हालात पर पीएम से चर्चा के लिए महबूबा दिल्ली पहुंची हों। उन्होंने कहा, 'अलगाववादियों को आगे आना चाहिए और निर्दोष लोगों का जीवन बचाने में जम्मू कश्मीर सरकार की मदद करनी चाहिए।' वह बोलीं, 'यह समय पाकिस्तान के लिए जवाब देने का है कि वह कश्मीर में शांति चाहता है या नहीं ।
महबूबा ने अलगाववादियों के प्रति अपनी सख्ती दिखाते हुए कहा, 'एनकाउंटर पहले भी हुए, आज भी हो रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे। अलगाववादियों ने कॉल दी है आर्मी कैंप को घेराव करो, आखिर चाहते क्या हैं? जो लोग सड़कों पर नौजवानों को उकसाते हैं उन्हें बातचीत में दिलचस्पी नहीं है। जिनकी विचारधारा अलग है, उनके साथ संजीदगी से बातचीत होनी चाहिए। बातचीत उन्हीं से हो सकती है जो इसमें दिलचस्पी रखते हैं। सबके साथ बातचीत हो ये मैं कहती हूं लेकिन अलगाववादी को तय करना है कि वो बातचीत करना चाहते हैं कि नहीं। अलगाववादी एक तरफ आर्मी कैंप पर धावा बोलने के लिए कहते हैं दूसरी तरफ बातचीत के लिए। उनसे क्या बातचीत होगी?'
'बाजी' कहने वाले आज पत्थर फेंक रहे
ndtv की ख़बर के मुताबिक, महबूबा ने कहा कि कुछ लोग नौजवानों और बच्चों को बरगला कर पत्थर फेंकवा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोग इज्जत से जीना चाहते हैं। किसी भी किताब में किसी वतन में जम्हूरियत में इतनी आजादी नहीं होगी जितनी यहां हैं। जम्मू-कश्मीर में मेरे जुलूस में छोटे-छोटे बच्चे होते थे जंगलों में यही बच्चे मुझे बाजी बुलाकर मेरी ढाल बनते थे। आज पत्थर फेंक रहे हैं लोगों को मारने के लिए सड़कों पर हैं। मेरी मीडिया से गुजारिश है मेरी मदद करिए, कोई ऐसी बात न कहें जो हालात को तनावपूर्ण बनाए।
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