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विवादित आदेश पर मेघालय HC ने कहा, धर्मनिरपेक्षता के बारे में कुछ नहीं कहा

अपने हालिया विवादित आदेश की वजह से आलोचना झेल रहे मेघालय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस आर सेन ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि ना तो उनका फैसला राजनीति से प्रेरित था ना उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ कुछ कहा है।

विवादित आदेश पर मेघालय HC ने कहा, धर्मनिरपेक्षता के बारे में कुछ नहीं कहा

अपने हालिया विवादित आदेश की वजह से आलोचना झेल रहे मेघालय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस आर सेन ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि ना तो उनका फैसला राजनीति से प्रेरित था ना उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ कुछ कहा है। उन्होंने कहा कि उनके फैसले की ‘‘गलत व्याख्या' की गयी।

उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर ‘पीठ की ओर से स्ष्टीकरण' में कहा गया है कि वह ना तो किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव रखते हैं और ना ही सेवानिवृत्ति के बाद किसी राजनीतिक पद पाने की उनकी ख्वाहिश है।

न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने जाति, नस्ल, धर्म या भाषा से ऊपर उठकर भारत के नागरिकों की रक्षा के लिए सत्य, इतिहास और जमीनी सचाई के आधार पर फैसला लिखा।

न्यायाधीश ने 10 दिसंबर के अपने फैसले में कहा था कि आजादी के बाद भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए था जैसे कि पाकिस्तान इस्लामी देश बना और किसी को भी भारत को इस्लामी देश में बदलने का प्रयास नहीं करना चाहिए । उनके फैसले के बाद विवाद पैदा हो गया था।

माकपा ने देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई से न्यायामूर्ति सेन को उनके न्यायिक कामकाज से मुक्त करने का अनुरोध किया और आरोप लगाया कि उनका कथन संविधान के मौलिक ढांचे के खिलाफ है।

न्यायाधीश सेन ने कहा है, ‘‘ इसके, साथ ही मैं यहां स्पष्ट करना चाहूंगा कि अपने फैसले में मैंने कहीं भी धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ कुछ नहीं कहा है और मेरा फैसला इतिहास का संदर्भ देता है और इतिहास को कोई बदल नहीं सकता।'

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं धार्मिक कट्टर नहीं हूं बल्कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं क्योंकि मेरे लिए ईश्वर एक है।'
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