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मेडिकल एडमिशन घोटालाः जस्टिस शुक्ला के खिलाफ मिले सबूत, CJI दीपक मिश्रा करेंगे कार्रवाई

सीजेआई द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद जस्टिस शुक्ला को पद से हटाए जाने और उनके खिलाफ सीबीआई जांच का चलाए जाने के रास्ता साफ हो गया है।

मेडिकल एडमिशन घोटालाः जस्टिस शुक्ला के खिलाफ मिले सबूत, CJI दीपक मिश्रा करेंगे कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एसएन शुक्ला की मुश्किलें बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को सलाह दी है कि जस्टिस एसएन शुक्ला से सभी न्यायिक काम वापस ले लें। सीजेआई द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद जस्टिस शुक्ला को पद से हटाए जाने और उनके खिलाफ सीबीआई जांच का चलाए जाने के रास्ता साफ हो गया है।

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दरअसल मेडिकल एडमिशन घोटाले में एसएन शुक्ला की भूमिका की जांच कर रहे दल को उनके खिलाफ सबूत मिल गए हैं। अब तीन जजों के इन हाउस पैनल ने भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस दीपक मिश्रा से उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की है।
बता दें कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उठाया था। पैनल की सिफारिश को स्वीकार करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने जस्टिस शुक्ला को इस्तीफा देने या स्वेच्छा से रिटायरमेंट लेने का विकल्प दिया था। लेकिन, जस्टिस शुक्ला ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक जस्टिस शुक्ला के इनकार के बाद चीफ जस्टिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को तत्काल प्रभाव से सभी न्यायिक कामों को जस्टिस शुक्ला से लेने के निर्देश दिए हैं। उनके इस कदम से जस्टिस शुक्ला को पद से हटाने का भी रास्ता साफ हो गया है। इसके बाद सीबीआई भी जस्टिस शुक्ला के ऊपर केस दर्ज कर सकती है।

कैसे हुई कार्रवाई

पिछले साल 1 सितंबर को चीफ जस्टिस को इस मामले में एडवोकेट जनरल ऑफ द स्टेट की शिकायत मिली, जिसके बाद इस मामले की जांच के लिए तीन जजों की इन-हाउस कमेटी का गठन किया गया। मद्रास हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी, सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस के अग्निहोत्री और एमपी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पी के जायसवाल इस कमेटी के सदस्य थे।
कमेटी ने अपनी जांच के बाद चीफ जस्टिस से सिफारिश की, 'जस्टिस शुक्ला ने न्यायिक मूल्यों को क्षति पहुंचाई है। उन्होंने एक जज की भूमिका को ठीक प्रकार से नहीं निभाया और अपने ऑफिस की सर्वोच्चता, गरिमा और विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाने वाला काम किया है।' इन हाउस प्रक्रिया के अनुच्छेद (ii) के तहत चीफ जस्टिस अपने फैसले की जानकारी पीएम और राष्ट्रपति को देंगे और जस्टिस शुक्ला को पद से हटाने की सिफारिश करेंगे।

क्या लगे हैं आरोप

जस्टिस शुक्ला का आरोप है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक बेंच की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने 2017-18 के शैक्षणिक वर्ष में छात्रों को प्रवेश देने के लिए निजी कॉलेजों को अनुमति दे दी थी। उनका यह कदम सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ के पारित आदेश का उल्लंघन था। इस संबंध में जस्टिस शुक्ला के खिलाफ दो शिकायतें चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से की गईं।
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