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मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस: स्वामी असीमानंद समेत पांचो आरोपी बरी, जानिए इस मामले में अबतक क्या-क्या हुआ

हैदराबाद में ऐतिहासिक मक्का मस्जिद के भीतर जुमे की नमाज के दौरान दिन में करीब एक बजकर 25 मिनट पर विस्फोट हुआ। 16 अप्रैल 2018 को एनआईए) की विशेष अदालत ने मामले में स्वामी असीमानंद सहित पांच अन्य को बरी कर दिया।

मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस: स्वामी असीमानंद समेत पांचो आरोपी बरी, जानिए इस मामले में अबतक क्या-क्या हुआ

हैदराबाद में ऐतिहासिक मक्का मस्जिद के भीतर जुमे की नमाज के दौरान दिन में करीब एक बजकर 25 मिनट पर विस्फोट हुआ। इसमें नौ लोग मारे गए और 58 लोग घायल हुए; संपत्ति को नुकसान पहुंचाने , पथराव , पुलिस के साथ झड़प और पुलिस की गोलीबारी में पांच लोगों की मौत।

मस्जिद में विस्फोट और बरामद एक आईईडी के मामले में हैदराबाद में हुसैनी आलम थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ दो मामले दर्ज किये गए। इसके बाद, दोनों मामले सीबीआई को स्थानांतरित किया गया।

2010 में छह आरोपियों का नाम जोड़ा गया

केंद्रीय एजेंसी ने जून 2010 और नवंबर 2010 के बीच छह आरोपियों का नाम जोड़ा और 19 नवंबर 2010 को हरिद्वार से दक्षिणपंथी कार्यकर्ता स्वामी असीमानंद उर्फ नब कुमार सरकार सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने दिसंबर 2010 में आरोपपत्र दाखिल किया।

2011 में सीबीआई से मामला एनआईए के पास आया

एनआईए ने अप्रैल 2011 में सीबीआई से मामला लिया। उसने आईपीसी और विस्फोटक पदार्थ कानून और गैर कानूनी गतिविधि ( रोकथाम ) कानून की संबंधित धाराओं के तहत फिर से मामले दर्ज किये ।

2012-13 में आरोपपत्र दाखिल

एनआईए ने मई 2011, जुलाई 2012 और अगस्त 2013 के बीच तीन पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।

मार्च 2017

मार्च 2017 में मामले में स्वामी असीमानंद को सह आरोपी मोहनलाल रतेश्वर उर्फ भरत भाई के साथ जमानत मिली । देवेंद्र गुप्ता , लोकेश शर्मा और राजेंद्र चौधरी न्यायिक हिरासत में लिये गए और हैदराबाद में चेरलापल्ली केंद्रीय जेल भेजे गए।

मार्च 2018

पांच आरोपी देवेंद्र गुप्ता , लोकेश शर्मा , स्वामी असीमानंद , भरत मोहनलाल रतेश्वर और राजेंद्र चौधरी ने मामले में मुकदमे का सामना किया और मार्च 2018 में सुनवाई पूरी।

16 अप्रैल 2018

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने मामले में स्वामी असीमानंद सहित पांच अन्य को बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन उनके खिलाफ मामला साबित करने में नाकाम रहा। अदालत ने देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद, भरत मोहनलाल रतेश्वर और राजेंद्र चौधरी को सभी आरोपों से बरी किया।

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