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मायावती के लिए ''लकी'' नहीं रहा ट्विटर पर आना, दूसरे ही दिन सुप्रीम कोर्ट से लगा तगड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी और हाथियों की मूर्तियां बनाने में जितना जनता का पैसा खर्च किया है, उसे वापस करना चाहिए।

मायावती के लिए

सुप्रीम कोर्ट ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी और हाथियों की मूर्तियां बनाने में जितना जनता का पैसा खर्च किया है, उसे वापस करना चाहिए।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे थे। इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। मायावती के वकील ने मामले की सुनवाई मई के बाद करने की अपील की, लेकिन कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया।

आपको बता दें कि मायावती के द्वारा उत्तर प्रदेश में बसपा शासनकाल में कई पार्कों का निर्माण करवाया गया। ये पार्क लखनऊ, नोएडा समेत अन्य शहरों में बनवाए गए थे। इन पार्कों में बसपा संस्थापक कांशीराम, मायावती और हाथियों की मूर्तियां लगवाई गई थीं।

अपने क्लाइंट से कहें पैसा जमा कराएं : गोगोई

सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में दायर रविकांत और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने मायावती के वकील को कहा कि अपने क्लाइंट को कह दीजिए कि वे मूर्तियों पर खर्च हुए पैसों को सरकारी खजाने में जमा कराएं।

10 साल पुरानी याचिका पर सुनवाई

लगभग 10 साल पुरानी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया तो बसपा प्रमुख को मूर्तियों पर खर्च किया गया जनता का पैसा लौटाना होगा। उन्हें यह पैसा वापस लौटाना चाहिए। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी 2015 में उत्तर प्रदेश की सरकार से पार्क और मूर्तियों पर खर्च हुए सरकारी पैसे की जानकारी मांगी थी।

खर्च हुए थे करीब 6000 करोड़!

उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के दौरान लखनऊ विकास प्राधिरकरण के रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बनाए गए पार्कों पर कुल 5,919 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

कहां, कितनी लगीं मूर्तियां

रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल पर बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी की पत्थर की 30 मूर्तियां जबकि कांसे की 22 प्रतिमाएं लगवाई गईं थी। इसमें 685 करोड़ का खर्च आया था। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन पार्कों और मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5,634 कर्मचारी बहाल किए गए थे।

अखिलेश सहित विपक्ष उठाता रहा सवाल

गौरतलब है कि 2012 विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। तब अखिलेश ने मायावती पर 40 हजार करोड़ के मूर्ति घोटाले का आरोप लगाया था। ये मुद्दा इससे पहले भी चुनावों में उठता रहता है और विपक्षी इस मुद्दे पर निशाना साधते हैं।

तेजस्वी पर सुको ने ठोका 50 हजार का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उन्हें विपक्ष के नेता के लिए बने आवास में जाकर रहने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की 3 सदस्यीय पीठ ने सरकार के फैसले को चुनौती देने और कोर्ट का समय खराब करने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी ठोंक दिया। तेजस्वी ने सरकारी आवास खाली करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।

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