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स्वतंत्रता दिवस विशेषः इन्होंने दिया था पहली बार इन्कलाब जिन्दाबाद का नारा

70वें स्वतंत्रा दिवस को लेकर पूरे देश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

स्वतंत्रता दिवस विशेषः इन्होंने दिया था पहली बार   इन्कलाब जिन्दाबाद   का नारा
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15 अगस्त 2017 को पूरा देश 70वें स्वतंत्रा दिवस को पूरे धूमधाम से मनाएगा। इसको लेकर अभी से ही जोर-शोर से तैयारियां की जा रही है।

आज देश आजाद है और यह सुकून भरा पल करोड़ों देश वासियों को उन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदान से दिए हैं।

इन्हीं बलिदानियों में से एक थे मौलाना हसरत मोहानी जिन्होंने पहली बार 'इन्कलाब जिन्दाबाद' का नारा दिया था।

आज किसी मुद्दे के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आपने इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए आपने कई बार सुना होगा। इस नारे में कुछ तो ऐसी बात है कि इसे बोलते-बोलते भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव फांसी के फंदे पर खुशी-खुशी झूल गए। चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों से घिरे होने के बावजूद आजाद ही मौत को गले लगाया।

आजादी के समय जन-जन की आवाज बन चुके इस नारे के बारे में लोगों के अंदर भ्रान्ति है कि इसे भगत सिंह ने दिया था, पर असलियत ये है कि इस नारे को भगत सिंह के जन्म से पूर्व ही लिखा जा चुका था।

मौलाना हसरत मोहानी जो एक उर्दू शायर, पत्रकार, राजनीतिज्ञ, स्वतंत्रता सेनानी तथा संविधान सभा के सदस्य थे।

1875 में हुआ था यूपी में जन्म

मौलाना हसरत मोहानी का जन्म उन्नाव जिले के मोहान जिला में हुआ था। हिन्दुस्तान की आजादी के सबसे मशहूर नारों में से एक ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ का नारा 1921 में उन्होंने दिया जिसे बाद में शहीद भगत सिंह ने मशहूर किया। वो भारत कम्युनिस्ट पार्टी के फाउंडर-मेंबर भी थे। 13 मई 1951 को लखनऊ में उनका देहांत हो गया।

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