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लाभ का पद मामला: पूर्व केंद्रीय मंत्री और SC के पूर्व जज ने ''राष्ट्रपति'' के फैसले पर उठाए सवाल

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के फैसले की सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने आलोचना की है।

लाभ का पद मामला: पूर्व केंद्रीय मंत्री और SC के पूर्व जज ने

दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को लाभ के पद पर रहने के आरोप में अयोग्य घोषित कर दिया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के इस फैसले की सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने आलोचना की है।

जस्टिस काटजू ने एक ट्वीट के जरिये के कहा कि आजादी के बाद से अब तक से 9500 से अधिक संसदीय सचिव रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस सब में से 455 को नोटिस जारी किये, वहीं हाई कोर्ट ने ऐसी 100 से ज्यादा नियुक्तियों को खारिज कर दिया है।
जस्टिज काटजू का कहना है कि यह पहली मामला है जिसमें विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया है। अपने ट्वीट के आखिरी में उन्होंने कहा कि यह 'विशुद्ध बदला' है।काटजू के इस ट्वीट के बाद बड़ी संख्या में लोग इस ट्वीट का रीट्वीट कर आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनाव आयोग के फैसले का विऱोध कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर राष्ट्रपति के इस फैसले को तुगलकशाही' बताया है। सिन्हा ने कहा आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में न ही कोई सुनवाई हुई न ही हाई कोर्ट के आदेश का इंतजार किया गया।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सिफारिश की थी कि आम आदमी पार्टी के 20 विधायक लाभ के पद पर हैं उन्हें आयोग्य घोषित किया जाये। चुनाव आयोग के इस फैसले को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वीकार कर लिया है। सोमवार को इस मामले में हाई कोर्ट फैसला सुनायेगा। अगर कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो इन 20 सीटों पर फिर से मतदान किया जायेगा।
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