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मराठवाड़ा के किसानों को सूखा नहीं अब बाढ़ कर रहा है ''बर्बाद''

सूखे के बाद बाढ़ ने मराठवाड़ा की पूरी फसल बर्बाद कर दी है

मराठवाड़ा के किसानों को सूखा नहीं अब बाढ़ कर रहा है
लातूर. महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र जो लगभग पांच साल तक सूखे की मार झेलता रहा और अब जब बारिश हुई है तो तबाही मचा रही है। लातूर के अरुण समुद्रे ने कहा, 'यह इस इलाके पर दोहरी मार है। पहले हम सूखा झेल रहे थे और अब पांच सालों बाद बारिश है, तो तबाही मचा रही है। सूखे के बाद बाढ़ ने मराठवाड़ा की पूरी खरीफ फसल को उजाड़ दिया। आठ जिलों में से चार-नांदेड़, लातूर, बीड और ओसमानानड़ पर सबसे ज्यादा मार हुई है। अकेले लातूर जिले में पांच लाख हैक्टेयर जमीन की फसल बह गई।
मुंबई और पुणे की जा रहे थे किसान
मराठवाड़ा की सभी नदियां और जलाशय सूख गए थे और लोगों को रोजगार के लिए मुंबई और पुणे जैसे शहरों में पलायन करना पड़ा था। किसानों के लिए सूखे में रहना मुश्किल हो गया था। उन्होंने अपने पशु तक बेच दिए थे। लातूर जिला तो उस समय सूखे का ब्रांड अंबेसडर बन गया था, जब मिराज से सांगली जिले तक पीने का पानी ट्रेन से पहुंचाया जा रहा था।
मानसून के शुरुआती दिनों में संतोषजनक बारिश से उत्साहित किसानों ने कॉटन, सोयाबीन, अनाज और दालों की बोवाई की थी। पांच साल की टूटन के बाद उन्हें अच्छी आय की उम्मीद थी। पर अब उनकी खुशी को सच में बाढ़ खा गई। लगातार बारिश से न केवल फसलें बह गईं, बल्कि जीवन और संपत्ति का भी नुकसान हुआ।
नागरिक स्रोतों के मुताबिक बाढ़ से इलाके के 1700 गांव, 20 से ज्यादा लोग और लगभग 200 पशु प्रभावित हुए हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि एनडीआरएफ को उनके बचाव के लिए बुलाया गया। एनडीआरएफ की टीम ने लातूर और नांदेड़ जिलों में विभिन्न इलाक़ों में फंसे 65 लोगों को बचाया।
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