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महाराष्ट्रः बीते 4 महीने में मराठवाड़ा में 342 किसानों ने की आत्महत्या

साल की शुरुआत से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक कुल 838 किसानों ने आत्महत्या की

महाराष्ट्रः बीते 4 महीने में मराठवाड़ा में 342 किसानों ने की आत्महत्या
औरंगाबाद. एक और जहां देश सीमा पर अपने जवानों को खो रहा है तो दूसरी तरफ देश के अंदर ही किसानों को भी गंवा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, मराठवाड़ा में जून के पहले हफ्ते से लेकर अक्टूबर महीने तक 342 किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा है।
अच्छे मॉनसून के बावजूद किसानों ने आत्महत्या की
मराठवाड़ा में इतने अधिक संख्या में किसानों की आत्महत्या ने अधिकारियों को हैरान कर दिया है। इस बार इलाके में मॉनसून अच्छा रहा और बारिश भी अच्छी हुई, उसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर किसानों की आत्महत्या से सभी चिंतित हैं।
2016 में अब तक 838 किसान कर चुके हैं आत्महत्या
साल की शुरुआत से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक कुल 838 किसानों ने आत्महत्या की। जबकि पिछले साल यह आंकड़ 778 का था। जून से लेकर अक्टूबर तक मराठवाड़ा के आठ जिलों में बीड में सबसे ज्यादा 93 किसानों ने आत्महत्या की। उसके बाद नांदेड़ और उस्मानाबाद में किसान आत्महत्या के 58 मामले सामने आए। इन सभी आंकड़ों को संभागीय स्तर पर इकट्ठा किया गया है फिर भी बड़े पैमाने पर किसानों के आत्महत्या की वजहें स्पष्ट नहीं हो सकी हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इससे पहले आत्महत्या के पीछे किसानों की खराब वित्तीय हालत, सूखा, बैंक का कर्ज चुकाने में असमर्थता जैसी मुश्किलें जिम्मेदार होती थीं। राजस्व विभाग इन मामलों को देखेगा कि इन किसानों का परिवार मुआवजे के लिए पात्र है कि नहीं।
बीड के डेप्युटी कलेक्टर चंद्रकांत सूर्यवंशी ने स्वीकार किया कि सरकारी मशीनरी अच्छे मॉनसून के बावजूद हो रही आत्महत्याओं से हैरान थी। उन्होंने कहा, '2014 की अपेक्षा में 2015 में ज्यादा किसानों ने आत्महत्याएं कीं। उस वक्त क्षेत्र में पानी की भयंकर कमी थी। इस बार बारिश अच्छी हुई इसलिए हमें आत्महत्या की संख्या कम होने की उम्मीद थी।'
किसान कार्यकर्ता जयाजी सूर्यवंशी ने कहा कि उन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की जहां सोयाबीन का उत्पादन अधिक होता है। उन्होंने कहा, 'मॉनसून के दोबारा वापस आने की वजह से किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुम। कई जगह पर बाढ़ जैसे हालात हो गए और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ गया।'
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